उप-राष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने 38वें पुणे फेस्टिवल का किया उद्घाटन, 'विकास भी, विरासत भी' के विजन पर दिया जोर
उप-राष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने पुणे फेस्टिवल के उद्घाटन के दौरान देश के इतिहास और नायकों के बलिदानों को याद रखने तथा विकास के साथ सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की आवश्यकता पर बल दिया।

उप-राष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने पुणे के श्री गणेश कला क्रीड़ा रंगमंच में 38वें पुणे फेस्टिवल का उद्घाटन किया। इस अवसर पर महाराष्ट्र के राज्यपाल श्री जिष्णु देव वर्मा, उप-मुख्यमंत्री श्रीमती सुनेत्रा पवार, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री श्री चंद्रकांत पाटिल, संस्कृति मंत्री श्री आशीष शेलार, सांसद श्रीमती हेमा मालिनी, सांसद डॉ. मेधा कुलकर्णी और पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री श्री सुशील कुमार शिंदे सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
अपने संबोधन में उप-राष्ट्रपति ने कहा कि देश को अपना इतिहास और नायकों द्वारा दिए गए महान बलिदानों को कभी नहीं भूलना चाहिए। उन्होंने हिंदू धर्म और भारत की सांस्कृतिक विरासत को बचाने में छत्रपति शिवाजी महाराज के योगदान को याद रखने पर जोर दिया। इसके साथ ही उन्होंने लोकमान्य तिलक, महात्मा ज्योतिबा फुले, क्रांतिज्योति सावित्रीबाई फुले और बाबासाहेब बी. आर. अंबेडकर को श्रद्धांजलि अर्पित की।
महाराष्ट्र और तमिलनाडु के बीच गहरे ऐतिहासिक संबंधों का उल्लेख करते हुए श्री राधाकृष्णन ने बताया कि मराठा नेताओं के कारण ही तंजावुर की सरस्वती महल लाइब्रेरी में तमिल साहित्य सुरक्षित रह सका है। उन्होंने पुणे की वैश्विक पहचान की सराहना की और उद्घाटन सत्र में लगभग 20 देशों के छात्रों द्वारा प्रस्तुत पारंपरिक गणेश पूजा कार्यक्रम को "वसुधैव कुटुंबकम" की भावना का एक सुंदर उदाहरण बताया।
उप-राष्ट्रपति ने कहा कि पुणे अपनी सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखते हुए शिक्षा, उद्योग, खेल, सूचना प्रौद्योगिकी, ऑटोमोबाइल निर्माण, पर्यटन और बागवानी के एक बड़े केंद्र के रूप में विकसित हुआ है। उन्होंने पुणे को "त्योहारों का शहर" बनाने में इस फेस्टिवल के योगदान और इसके संस्थापक स्वर्गीय श्री सुरेश कलमाडी की सोच की सराहना की। उन्होंने 'उगवते तारे', 'इंद्रधनु' और 'महिला महोत्सव' जैसे कार्यक्रमों का उल्लेख करते हुए युवा और महिला कलाकारों को मंच देने के प्रयासों की प्रशंसा की।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के "विकास भी, विरासत भी" विजन को दोहराते हुए उप-राष्ट्रपति ने कहा कि आधुनिकता और तकनीकी प्रगति के लिए सांस्कृतिक मूल्यों का त्याग करने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि 'विकसित भारत' के विजन में आर्थिक विकास और इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ-साथ एक ऐसा समावेशी समाज शामिल है जो अपनी सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा हो।
कार्यक्रम के दौरान, उप-राष्ट्रपति ने भारतीय सिनेमा और प्रदर्शन कला में विशिष्ट योगदान के लिए अनुभवी अभिनेता श्री मोहन जोशी को 'संस्थापक सुरेश कलमाड़ी पुणे फेस्टिवल लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार' से सम्मानित किया। उन्होंने आशा व्यक्त की कि पुणे महोत्सव आगे भी राष्ट्रीय एकता, पर्यटन और युवा प्रतिभाओं को प्रेरित करता रहेगा।
