केंद्रीय राज्य मंत्री रक्षा खडसे ने 93 विश्वविद्यालयों के कुलपतियों के साथ की बैठक, 'विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग 2027' में भागीदारी बढ़ाने का आह्वान
केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल राज्य मंत्री रक्षा खडसे ने उच्च शिक्षण संस्थानों को विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग 2027, नशा मुक्त अभियान और युवा कनेक्ट कार्यक्रम में छात्रों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने का आग्रह किया है।

केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल राज्य मंत्री रक्षा खडसे ने देश भर के 93 विश्वविद्यालयों के कुलपतियों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय की प्रमुख युवा-केंद्रित पहलों में उच्च शिक्षण संस्थानों की भागीदारी को बढ़ाना था।
बैठक में 40 केंद्रीय विश्वविद्यालयों, 38 राज्य विश्वविद्यालयों और 13 डीम्ड एवं निजी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों ने भाग लिया। इसके साथ ही मणिपुर के राष्ट्रीय खेल विश्वविद्यालय और ग्वालियर के लक्ष्मीबाई राष्ट्रीय शारीरिक शिक्षा संस्थान के प्रतिनिधियों ने भी इसमें शिरकत की। इस अवसर पर युवा कार्यक्रम सचिव श्री सुनील पालीवाल, संयुक्त सचिव श्री शिव रतन, मेरा युवा भारत के निदेशक श्री सलिल कुमार और राष्ट्रीय सेवा योजना के निदेशक श्री प्रशांत प्रिया गौतम सहित कई शिक्षाविद उपस्थित थे।
कुलपतियों को संबोधित करते हुए सुश्री रक्षा खडसे ने 'विकसित भारत @2047' के विजन को आगे बढ़ाने में शैक्षणिक संस्थानों के सामूहिक दायित्व पर जोर दिया। उन्होंने विश्वविद्यालयों से आह्वान किया कि वे युवाओं के लिए नेतृत्व, सामुदायिक जुड़ाव और रचनात्मक संवाद के अधिक अवसर सृजित करें। उन्होंने 'विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग 2027' के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की और प्रोत्साहित किया कि छात्र इसमें बढ़-चढ़कर हिस्सा लें, ताकि उन्हें नीति निर्माताओं, विशेषज्ञों और राष्ट्रीय नेताओं के साथ अपने विचार और समाधान साझा करने का अवसर मिल सके।
इसके अलावा, राज्य मंत्री ने 'नशा मुक्त अभियान' के माध्यम से जागरूकता फैलाने और युवा नेतृत्व को सशक्त बनाने तथा 'युवा कनेक्ट कार्यक्रम' के जरिए छात्रों को विभिन्न अवसरों से जोड़ने का आग्रह किया। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि शिक्षण संस्थान केवल परिसर तक सीमित न रहकर समुदायों में भी युवा पहलों का विस्तार करें। सुश्री खडसे ने कुलपतियों से राष्ट्र निर्माण और सामाजिक दायित्व के लिए एक सुदृढ़ पारितंत्र विकसित करने में सहयोग मांगा।
बैठक में प्रोफेसर नीलोफर खान, प्रोफेसर दिवाकर सिंह राजपूत, प्रोफेसर कल्पना शर्मा, प्रोफेसर दिबाकर चंद्र डेका, दलजीत सिंह चौधरी और प्रोफेसर सुरेश गोसावी जैसे शिक्षाविदों ने भी भाग लिया।

