खान मंत्रालय ने आयोजित किया राष्ट्रीय राजभाषा सम्मेलन 2026, हिंदी के प्रभावी प्रयोग पर दिया जोर
खान मंत्रालय द्वारा आयोजित राष्ट्रीय राजभाषा सम्मेलन 2026 में हिंदी साहित्य, मीडिया और राजभाषा के प्रयोग पर चर्चा की गई और विजेता कर्मचारियों को सम्मानित किया गया।

खान मंत्रालय द्वारा 'राष्ट्रीय राजभाषा सम्मेलन 2026' का आयोजन किया गया। यह सम्मेलन हिंदी भाषा, साहित्य, मीडिया और राजभाषा के प्रभावी प्रयोग को समर्पित था। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन, राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ और राष्ट्रगान के गायन के साथ हुआ।
इस अवसर पर खान मंत्रालय की निदेशक श्रीमती गीतिका शर्मा ने सचिव श्री केशव चंद्र, अपर सचिव डॉ. वीना कुमारी डी. और संयुक्त सचिव श्रीमती फरीदा एम. नाइक का स्वागत किया। संयुक्त सचिव श्रीमती फरीदा एम. नाइक ने बताया कि इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य अधिकारियों और कर्मचारियों को हिंदी के सहज और प्रभावी प्रयोग के लिए प्रेरित करना है। वहीं, अपर सचिव डॉ. वीना कुमारी डी. ने दैनिक शासकीय कार्यों में सरल और स्पष्ट हिंदी के निरंतर उपयोग पर जोर दिया।
सचिव श्री केशव चंद्र ने हिंदी साहित्य की समृद्ध परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि साहित्य न केवल भाषा को समृद्ध करता है, बल्कि समाज में सांस्कृतिक चेतना और संवेदनाओं को भी मजबूत करता है। उन्होंने इस सम्मेलन को वर्तमान कार्य-संस्कृति को हिंदी की विरासत से जोड़ने का एक अवसर बताया।
सम्मेलन के दौरान विभिन्न विषयों पर पैनल चर्चा आयोजित की गई। “हिंदी साहित्य को सुदृढ़ करता लेखन” विषय पर प्रो. सुधीश पचौरी, डॉ. ममता कालिया और प्रो. जितेंद्र श्रीवास्तव ने लेखन की सामाजिक प्रासंगिकता पर विचार साझा किए, जबकि डॉ. अंजुम शर्मा ने सत्र का संचालन किया। वहीं, “हिंदी भाषा और मीडिया” सत्र में सुश्री रंजना सिंह राठौड़, श्री विनीत कुमार और श्री अशोक श्रीवास्तव ने डिजिटल माध्यमों में हिंदी की बढ़ती पहुंच और जनसंवाद में इसकी भूमिका पर चर्चा की। इस सत्र के वार्ताकार श्री राहुल डबास थे।
केंद्रीय कोयला एवं खान राज्य मंत्री श्री सतीश चंद्र दुबे और संयुक्त सचिव श्रीमती फरीदा एम. नाइक ने हिंदी पखवाड़े के दौरान आयोजित प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया। अपने संबोधन में श्री सतीश चंद्र दुबे ने हिंदी को विभिन्न संस्कृतियों को जोड़ने वाली सशक्त संवाद-भाषा बताया। उन्होंने कहा कि हिंदी के साथ-साथ क्षेत्रीय भाषाओं और स्थानीय बोलियों के संवर्धन को भी बढ़ावा दिया जाना चाहिए।
कार्यक्रम का समापन एक काव्य संध्या के साथ हुआ, जिसमें डॉ. विष्णु सक्सेना, सुश्री बलजीत कौर और कर्नल गौतम राजऋषि ने काव्य-पाठ प्रस्तुत किया।


