डिजिटल क्रांति की ओर भारत: एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग से बदलेगा विनिर्माण का भविष्य
भारत सरकार की राष्ट्रीय एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग रणनीति (NSAM) के माध्यम से देश 3D प्रिंटिंग तकनीक में वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनने की तैयारी कर रहा है।

भारत एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग (AM) यानी 3D प्रिंटिंग तकनीक के माध्यम से डिजिटल विनिर्माण की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। इस तकनीक में विनिर्माण प्रक्रिया को एक डिजिटल फाइल द्वारा नियंत्रित किया जाता है, जिससे डिजिटल डिजाइनों को वास्तविक भौतिक वस्तुओं में बदला जा सकता है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने फरवरी 2022 में 'राष्ट्रीय एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग रणनीति' (NSAM) शुरू की थी, जिसका उद्देश्य भारत में एक मजबूत एएम पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करना है।
इस रणनीति के तहत अब तक 1,54,000 से अधिक व्यक्तियों को प्रशिक्षित किया गया है और 56 एएम स्टार्ट-अप्स को सहायता प्रदान की गई है। NSAM का लक्ष्य वैश्विक एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग बाजार में 5 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल करना और भारत के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में लगभग 1 अरब अमेरिकी डॉलर जोड़ना है। इसके अतिरिक्त, सरकार का लक्ष्य 100 नए स्टार्ट-अप्स को बढ़ावा देना, 500 नए उत्पाद विकसित करना और 1 लाख कुशल श्रमिकों को प्रशिक्षित करना है।
एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग का प्रभाव भारत के कई रणनीतिक क्षेत्रों में दिख रहा है। अंतरिक्ष क्षेत्र में, IIT मद्रास के स्टार्ट-अप 'अग्निकुल कॉसमॉस' ने मई 2024 में AM प्रिंटेड सेमी-क्रायोजेनिक रॉकेट इंजन के साथ 'अग्निबाण-SOrTeD' लॉन्च किया। रक्षा क्षेत्र में, भारतीय सेना ने अहमदाबाद में अपनी पहली दो मंजिला आवासीय इकाई का निर्माण किया, जिसे मात्र 12 सप्ताह में पूरा किया गया। स्वास्थ्य सेवा में, MeitY और प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड के सहयोग से ओस्टियोफोर्ज जैसे स्टार्ट-अप प्राकृतिक रेशम और जैव-सिरेमिक सामग्रियों से 3D-प्रिंटेड अस्थि प्रत्यारोपण विकसित कर रहे हैं।
निर्माण क्षेत्र में भी इस तकनीक के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। 'केल्विन 6के प्रो' 3D प्रिंटर ने कम-कार्बन जियोपॉलीमर सामग्री का उपयोग कर 30 दिनों से कम समय में 2,500 वर्ग फुट का घर बनाकर अपनी क्षमता दिखाई है। यह तकनीक सीमेंट आधारित निर्माण की तुलना में लागत में 30 प्रतिशत और उत्सर्जन में 90 प्रतिशत तक की कमी ला सकती है।
सरकार अब इस रणनीति को 'NSAM 2.0' चरण में ले जा रही है। इस नए चरण में बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) के सृजन में तेजी लाने, एएम नेटवर्क का विस्तार करने और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी प्रौद्योगिकियों के व्यावसायीकरण पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। इसके साथ ही, अटल टिंकरिंग लैब (ATL) के माध्यम से स्कूल स्तर पर भी छात्रों को 3D प्रिंटिंग का व्यावहारिक अनुभव दिया जा रहा है, जिसके लिए प्रत्येक लैब को 20 लाख रुपये का अनुदान प्रदान किया जाता है।
उभरते विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार सम्मेलन (ESTIC)-2026 का दूसरा संस्करण 27–29 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित किया जाएगा। वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग सहित अन्य परिवर्तनकारी प्रौद्योगिकियों पर चर्चा की जाएगी, जो 'विकसित भारत 2047' के दृष्टिकोण को समर्थन प्रदान करेगा।


