पीएम स्मृति चिन्ह ई-नीलामी 2026: असम की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक शिल्प का होगा प्रदर्शन
पीएम स्मृति चिन्ह ई-नीलामी के 8वें संस्करण में असम के हथकरघे, बांस-बेंत शिल्प और ऐतिहासिक कलाकृतियों को प्रदर्शित किया गया है, जिसकी आय 'नमामि गंगे' कार्यक्रम को दान की जाएगी।

संस्कृति मंत्रालय द्वारा आयोजित पीएम स्मृति-चिन्ह ई-नीलामी 2026 के 8वें संस्करण में असम की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं और विरासत को विशेष रूप से प्रस्तुत किया गया है। इस संग्रह में राज्य की प्रसिद्ध हथकरघा परंपराओं, बांस और बेंत की शिल्पकारी, धातु शिल्प, पारंपरिक कला तथा विरासत वास्तुकला को दर्शाने वाले विभिन्न स्मृति-चिन्ह शामिल हैं। ये वस्तुएं असम के दैनिक जीवन की शिल्पकारी और उसकी गहन सांस्कृतिक स्मृति को प्रदर्शित करती हैं।
इस संग्रह में महत्वपूर्ण ऐतिहासिक हस्तियों और सांस्कृतिक संस्थानों से जुड़े स्मृति-चिन्ह भी शामिल हैं। इनमें बीर चिलाराई, भारत रत्न गोपीनाथ बोरदोलोई, स्वर्गदेव चाओलुंग सुकाफा और महापुरुष श्रीमंत शंकरदेव से संबंधित कलाकृतियां एवं स्मारक-स्वरूप वस्तुएं प्रमुख हैं। इसके अलावा, 1894 के पथरुघाट युद्ध का एक प्रस्तुतिकरण, बोरदुआ सत्रा तथा स्वाहिद स्मारक क्षेत्र एवं पार्क के मॉडल भी इस संग्रह का हिस्सा हैं।
असम से संबंधित ये स्मृति-चिन्ह इस ई-नीलामी के कुल 1,498 स्मृति-चिन्हों के व्यापक संग्रह का हिस्सा हैं। यह नीलामी नागरिकों, संग्राहकर्ताओं, संस्थानों और कला प्रेमियों को उन स्मृति-चिन्हों को प्राप्त करने का अवसर देती है, जो विभिन्न अवसरों पर प्रधानमंत्री को भेंट किए गए थे। नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय आधुनिक कला दीर्घा (एनजीएमए) में एक प्रदर्शनी भी आयोजित की गई है, जहां आगंतुक इन वस्तुओं के कलात्मक महत्व को देख सकते हैं।
संस्कृति मंत्रालय द्वारा एनजीएमए के माध्यम से आयोजित इस ई-नीलामी से प्राप्त होने वाली पूरी धनराशि 'नमामी गंगे' कार्यक्रम को दान की जाएगी, जो गंगा नदी के संरक्षण और पुनरुद्धार के लिए एक राष्ट्रीय मिशन है।
असम के कुछ प्रमुख योगदानों में निम्नलिखित वस्तुएं शामिल हैं: - रानी सती साधनी की मूगा रेशम कलाकृति, जिसे अहोम खाम शैली में तैयार किया गया है। - प्राकृतिक बांस और बेंत से बनी हस्तनिर्मित दीवार घड़ी। - जलकुंभी से निर्मित इको-क्राफ्ट गिफ्ट बॉक्स, जिसमें हाथ से बुनी चप्पलें, टोकरियां और टोपियां शामिल हैं। - पारंपरिक असमिया जापी, जो लाल और नीले पैटर्न से सुसज्जित है। - जटिल लाल और सुनहरे रूपांकनों वाले पारंपरिक असमिया गमूसे। - हस्तनिर्मित पीतल की खोराई, जो राज्य के धातु शिल्प कौशल को दर्शाती है। - लकड़ी से निर्मित कामाख्या मंदिर की लघु प्रतिकृति।