प्रधानमंत्री को मिले स्मृति चिन्हों की 8वीं ई-नीलामी: छत्तीसगढ़ की ढोकरा कला और जनजातीय विरासत का प्रदर्शन
प्रधानमंत्री को मिले स्मृति चिन्हों की 8वीं ई-नीलामी में छत्तीसगढ़ की 4,000 साल पुरानी ढोकरा कला और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित किया गया है।

संस्कृति मंत्रालय द्वारा आयोजित प्रधानमंत्री को मिले स्मृति चिन्हों की 8वीं ई-नीलामी में छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक गाथा को जीवंत किया गया है। इस संग्रह में राज्य के 16 स्मृति चिन्ह शामिल हैं, जो छत्तीसगढ़ की प्राचीन धातु-ढलाई परंपराओं, जनजातीय विरासत, भक्ति कला और समकालीन सांस्कृतिक पहचान को प्रदर्शित करते हैं।
इस संग्रह का मुख्य आकर्षण 4,000 साल पुरानी ढोकरा कला है, जो भारत की एक पारंपरिक 'लॉस्ट-वैक्स' (मोम-पिघलाकर ढलाई करने की) धातु-ढलाई शिल्प है। नीलामी में शामिल ढोकरा कला की कृतियों में हाथी के सिर वाले नंदी, खड़े हुए नंदी और माड़िया-माड़िन जनजातीय जोड़े की प्रतिमाएं प्रमुख हैं। इसके साथ ही, संग्रह में एक पारंपरिक अनुष्ठानिक पगड़ी भी शामिल है, जिसमें मयूर पंखों का गुच्छा, कौड़ियां, धातु की चकती और पीतल की घंटियां लगी हुई हैं।
सांस्कृतिक प्रभावों को दर्शाते हुए, इस संग्रह में रामनामी समाज का एक स्टोल शामिल है जो 'राम राम' मंत्र से ढका है। साथ ही, हाटकेश्वर महादेव, बुढ़ेश्वर महादेव, जय मां कुदरगढ़ी और मधेश्वर महादेव जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों को दर्शाने वाले स्मृति चिन्ह भी मौजूद हैं।
समकालीन छत्तीसगढ़ की झलक पेश करते हुए इस संग्रह में 'महतारी वंदन योजना' को दर्शाती एक वुडकट (लकड़ी की नक्काशीदार) पट्टी, 'छत्तीसगढ़ विधानसभा की रजत जयंती' का प्रतीक स्मृति चिन्ह और 'नवा रायपुर' के संस्थानों के मॉडल शामिल किए गए हैं।
इस ई-नीलामी की अंतिम तिथि को बढ़ाकर 31 अक्टूबर 2026 कर दिया गया है। नीलामी से प्राप्त होने वाली पूरी राशि का उपयोग 'नमामि गंगे परियोजना' की सहायता के लिए किया जाएगा। इच्छुक व्यक्ति आधिकारिक 'पीएम मेमेंटोस ई-ऑक्शन पोर्टल' (PM Mementos e-Auction Portal) के माध्यम से ऑनलाइन बोली लगा सकते हैं।
