प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अच्छे चरित्र और सदाचार के महत्व पर साझा किया संस्कृत सुभाषितम्
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक संस्कृत सुभाषितम् के माध्यम से बताया कि बुद्धि और वाक्पटुता के साथ अच्छा चरित्र होना ही व्यक्ति को श्रेष्ठ बनाता है।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने अच्छे चरित्र और सदाचार के महत्व को रेखांकित करते हुए एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया है। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (X) पर इस श्लोक को पोस्ट किया।
साझा किए गए सुभाषितम् में कहा गया है: “ज्ञानवांश्च तथा वाग्मि कर्मस्वपि च निश्चितः। एवं युक्तोऽपि न श्रेयान् यदि शीलविवर्जितः॥”
इस संस्कृत श्लोक का अर्थ है कि वह व्यक्ति जो बुद्धिमान है, बोलने की कला में निपुण (वाक्पटु) है और अपने कार्यों में निश्चित है, लेकिन यदि वह अच्छे चरित्र और सदाचार से रहित है, तो वह श्रेष्ठ नहीं कहला सकता। प्रधानमंत्री के इस संदेश के अनुसार, वास्तव में वही व्यक्ति श्रेष्ठ माना जाता है जो बुद्धि और कौशल के साथ-साथ अच्छे चरित्र एवं सदाचार से युक्त हो।


