रबी अभियान 2026-27: रबी फसलों के लिए 177.72 मिलियन टन का लक्ष्य, 22 अक्टूबर से शुरू होगा 'खेत बचाओ अभियान'
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रबी सीजन के लिए खाद की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने और किसानों को MSP की गारंटी देने की घोषणा की है।

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन- रबी अभियान 2026 के दौरान प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान उन्होंने रबी सीजन 2026-27 के लिए सरकार की तैयारियों और लक्ष्यों को साझा किया। श्री चौहान ने कहा कि मोदी सरकार किसी भी प्राकृतिक आपदा या मौसम की मार के बीच किसानों के साथ मजबूती से खड़ी है।
रबी उत्पादन के लिए सरकार ने कुल 373.93 मिलियन टन का राष्ट्रीय लक्ष्य रखा है, जिसमें अकेले रबी सीजन के लिए 177.72 मिलियन टन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। कृषि मंत्री ने बताया कि 22 अक्टूबर से 30 नवंबर 2026 तक देशव्यापी 'खेत बचाओ अभियान' चलाया जाएगा। इस अभियान के तहत आईसीएआर के वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्रों (KVK) के विशेषज्ञ और राज्य कृषि विभाग के अधिकारी सीधे खेतों में जाकर किसानों को मिट्टी की जरूरत के अनुसार यूरिया और डीएपी के संतुलित उपयोग तथा सही फसल चयन के बारे में जानकारी देंगे।
खाद की उपलब्धता पर चर्चा करते हुए श्री चौहान ने बताया कि राज्यों द्वारा कुल 380 लाख मीट्रिक टन उर्वरक की मांग की गई है, जिसकी आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। वर्तमान में देश में 163 लाख मीट्रिक टन से अधिक उर्वरक का भंडार उपलब्ध है। उन्होंने बताया कि एक पायलट प्रोजेक्ट के माध्यम से संतुलित खाद के उपयोग से उर्वरक की खपत में 27 प्रतिशत की कमी आई और 1400 करोड़ रुपये की सीधी बचत हुई, जिसे अब पूरे देश में लागू किया जाएगा।
किसानों के आर्थिक हितों की रक्षा के लिए मंत्री ने स्पष्ट किया कि दलहन और तिलहन की खरीद में यदि कीमतें न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से नीचे गिरती हैं, तो NAFED और NCCF जैसी नोडल एजेंसियां राज्यों का इंतजार किए बिना सीधे मंडियों में खरीद शुरू करेंगी। साथ ही, राज्यों को आरकेवीवाई (RKVY) और कृषोन्नति योजना के तहत अब तक 7,000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि हस्तांतरित की जा चुकी है।
प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित कर्नाटक और महाराष्ट्र जैसे राज्यों के लिए 3 अक्तूबर को विशेष केंद्रीय टीमें भेजी जा रही हैं। राहत कार्यों के लिए SDRF और NDRF के माध्यम से वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी।
प्रदूषण और पराली के मुद्दे पर श्री शिवराज सिंह चौहान ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि प्रदूषण के लिए केवल किसानों को दोषी ठहराना और उन्हें प्रताड़ित करना उचित नहीं है। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि 2019-20 में प्रदूषण में पराली का योगदान करीब 7 प्रतिशत था, जो अब घटकर लगभग 2.5 प्रतिशत रह गया है।
कृषि विकास के आंकड़ों पर चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि वर्ष 2015 के बाद खाद्यान्न उत्पादन की औसत वार्षिक वृद्धि दर बढ़कर 8.4 मिलियन टन प्रति वर्ष हो गई है और औसत विकास दर 3 प्रतिशत से बढ़कर 4.5 प्रतिशत हो गई है। इसके अलावा, एग्रीस्टैक, विशिष्ट फार्मर आईडी और मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) के जरिए भारतीय किसानों को वैश्विक बाजार से जोड़ने के प्रयास तेज किए जा रहे हैं।


