राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन: केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 10 राज्यों को सौंपे 1200 करोड़ रुपये के स्वीकृति पत्र
दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राज्यों के साथ समन्वय बढ़ाने और भारत को वैश्विक 'फूड बास्केट' बनाने का रोडमैप साझा किया।

नई दिल्ली में आयोजित 'राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन- रबी अभियान-2026' के दूसरे दिन केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में विभिन्न राज्यों के कृषि मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया। सम्मेलन के दौरान केंद्रीय मंत्री ने प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (पीएम-आरकेवीवाई) के तहत 10 राज्यों के कृषि मंत्रियों को 1200 करोड़ रुपये से अधिक के वित्तीय स्वीकृति पत्र प्रदान किए।
वित्तीय सहायता के वितरण विवरण के अनुसार, पश्चिम बंगाल को 290 करोड़, हरियाणा को 198 करोड़, छत्तीसगढ़ को 181 करोड़, अरुणाचल प्रदेश को 154 करोड़, बिहार को 114 करोड़, कर्नाटक को 104 करोड़, मिजोरम को 75 करोड़, हिमाचल प्रदेश को 64 करोड़, झारखंड को 58 करोड़ और पंजाब को 43 करोड़ रुपये के स्वीकृति पत्र दिए गए। श्री चौहान ने कहा कि केंद्र सरकार राज्यों को समय पर संसाधन उपलब्ध करा रही है ताकि योजनाओं का क्रियान्वयन धरातल पर तुरंत शुरू हो सके।
केंद्रीय मंत्री ने जोर देकर कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में देश की खाद्य सुरक्षा और किसानों की आजीविका के लिए केंद्र और राज्यों को दलगत राजनीति से ऊपर उठकर 'टीम एग्रीकल्चर' की भावना से कार्य करना होगा। उन्होंने बताया कि वर्ष 2015 के बाद देश की कृषि विकास दर 3 प्रतिशत से बढ़कर 4.5 प्रतिशत हो गई है और वार्षिक खाद्यान्न उत्पादन में औसत बढ़ोतरी 40 लाख टन से बढ़कर 84 लाख टन प्रतिवर्ष पहुंच चुकी है। साथ ही, 2023-24 से 2025-26 के बीच रबी खाद्यान्न उत्पादन में 205 लाख टन की वृद्धि दर्ज की गई है।
सहकारी संघवाद को मजबूत करने के लिए एक नई कार्यप्रणाली की घोषणा की गई है। अब हर महीने राज्यों के साथ वर्चुअल समीक्षा बैठकें होंगी। कृषि अभियानों की तैयारी के लिए वार्षिक कैलेंडर तय किया गया है, जिसके तहत खरीफ के लिए हर साल 10 मई को जिला स्तरीय और 17 मई को राज्य स्तरीय बैठक होगी। इसी प्रकार रबी अभियान के लिए 10 सितंबर को जिला और 17 सितंबर को राज्य स्तरीय बैठकें आयोजित की जाएंगी।
मिट्टी के स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण के लिए केंद्रीय मंत्री ने 22 अक्टूबर से 30 नवंबर तक देशव्यापी 'खेत बचाओ अभियान' चलाने का आह्वान किया। इस अभियान में सॉइल हेल्थ कार्ड के आधार पर उर्वरकों के संतुलित उपयोग पर जोर दिया जाएगा। इसके अलावा, झारखंड, बिहार, ओडिशा और पश्चिम बंगाल जैसे पूर्वी राज्यों में धान की कटाई के बाद खाली रहने वाले खेतों (राइस फेलो) में दलहन की खेती को प्रोत्साहित किया जाएगा।
श्री शिवराज सिंह चौहान ने नकली खाद, घटिया बीज और अमानक कीटनाशकों के प्रति 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाते हुए कहा कि किसानों से धोखाधड़ी करना राष्ट्र के प्रति अपराध है। उन्होंने राज्यों को ऐसे तत्वों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
किसानों को बेहतर दाम दिलाने के लिए सरकार पोस्ट हार्वेस्ट प्रबंधन और वैज्ञानिक भंडारण पर ध्यान केंद्रित कर रही है। उन्होंने घोषणा की कि तुअर, उड़द और मसूर की एमएसपी पर 100% सरकारी खरीद सुनिश्चित की जाएगी और 48 घंटे के भीतर भुगतान किया जाएगा। इसके साथ ही, अंतरराष्ट्रीय मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) के माध्यम से भारतीय कृषि उत्पादों को वैश्विक बाजारों से जोड़कर भारत को दुनिया का प्रमुख 'फूड बास्केट' बनाने का लक्ष्य रखा गया है।

