रेल सुरक्षा में बड़ा कदम: दक्षिण मध्य रेलवे पर पहली बार 'कवच 4.0' प्रणाली शुरू
भारतीय रेल ने दक्षिण मध्य रेलवे के हैदराबाद डिवीजन में कवच प्रणाली को वर्जन 3.2 से 4.0 में अपग्रेड किया है, जिससे रेल संचालन अधिक सुरक्षित और सटीक होगा।

भारतीय रेलवे ने रेल सुरक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए दक्षिण मध्य रेलवे (SCR) पर पहली बार 'कवच' संस्करण 4.0 का सफल संचालन शुरू किया है। यह उन्नयन हैदराबाद डिवीजन के मलकाजगिरि-कामारेड्डी खंड के 108 रूट किलोमीटर पर पूरा किया गया है, जहां पहले कवच का वर्जन 3.2 संचालित था।
रेल मंत्रालय के अनुसार, दक्षिण मध्य रेलवे पर 1,465 किलोमीटर मार्ग पर वर्जन 3.2 के संचालन से प्राप्त अनुभवों का उपयोग कर नवीनतम संस्करण 4.0 विकसित किया गया है। यह प्रणाली बेहतर सुरक्षा, उन्नत तकनीक और उच्च विश्वसनीयता प्रदान करती है। भारतीय रेलवे की योजना इसे व्यापक स्तर पर लागू करने की है।
कवच 4.0 में कई महत्वपूर्ण तकनीकी सुधार किए गए हैं, जिनमें स्थान की सटीकता (location accuracy) में वृद्धि शामिल है, जिससे ट्रेनों की स्थिति का अधिक सटीक निर्धारण संभव होगा। इसके अलावा, बड़े यार्डों में सिग्नल संबंधी बेहतर जानकारी से स्थितिजन्य जागरूकता बढ़ेगी। सिस्टम एकीकरण के लिए अब ऑप्टिकल फाइबर केबल (OFC) के माध्यम से स्टेशन-से-स्टेशन इंटरफेस और वर्तमान इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम के साथ सीधा इंटरफेस दिया गया है।
कवच एक स्वदेशी रूप से विकसित स्वचालित ट्रेन सुरक्षा (ATP) प्रणाली है। यह लोको पायलट को ट्रेन की गति निर्धारित सीमा के भीतर रखने में मदद करती है और विफलता की स्थिति में स्वचालित रूप से ब्रेक लगा सकती है। इसे मुख्य रूप से खतरे के सिग्नल को पार करने (SPAD) से रोकने, गंभीर परिस्थितियों में गति नियंत्रित करने और टक्करों के जोखिम को कम करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह प्रणाली खराब मौसम में भी सुरक्षित संचालन सुनिश्चित करती है और उच्चतम सुरक्षा प्रमाणन 'सेफ्टी इंटीग्रिटी लेवल-4' (SIL-4) मानकों को पूरा करती है।
इस प्रणाली के कार्यान्वयन के लिए रेलवे खंडों में स्टेशनों और ब्लॉक खंडों पर 'स्टेशन कवच', ट्रैक पर आरएफआईडी (RFID) टैग, दूरसंचार टावरों की स्थापना, ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाने और इंजनों पर 'लोको कवच' जैसे व्यापक बुनियादी ढांचे की आवश्यकता होती है।


