वाटरशेड विकास और प्रबंधन के लिए एनआरएए ने की उच्च स्तरीय तकनीकी बैठक, नए दिशा-निर्देशों पर हुई चर्चा
राष्ट्रीय वर्षा आधारित क्षेत्र प्राधिकरण (NRAA) ने नई दिल्ली में 'रिवार्ड' कार्यक्रम के तहत एक राष्ट्रीय स्तरीय तकनीकी समिति की बैठक आयोजित की, जिसका उद्देश्य आगामी पीढ़ी के वाटरशेड विकास के लिए तकनीकी दिशा-निर्देश तैयार करना है।

कृषि एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के राष्ट्रीय वर्षा आधारित क्षेत्र प्राधिकरण (NRAA) ने 22 सितंबर 2026 को नई दिल्ली के एनएएससी परिसर में एक उच्च स्तरीय बैठक का आयोजन किया। यह बैठक 'रिवार्ड' (नवीन विकास के माध्यम से जलवायु-अनुकूल कृषि के लिए वाटरशेड को दुरूस्त करना) कार्यक्रम के तहत राष्ट्रीय स्तर की तकनीकी समिति (NLTC) द्वारा आयोजित की गई थी। बैठक की अध्यक्षता एनआरएए के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) डॉ. चंद्र शेखर कुमार, आईएएस ने की।
इस महत्वपूर्ण बैठक में आईसीएआर के डीडीजी (एनआरएम) डॉ. एके नायक, डीओएलआर के संयुक्त सचिव (डब्ल्यूएम) श्री नितिन खाडे, आईएएस, ओडिशा के निदेशक (डीएससी एवं डब्लूडी) डॉ. सुब्रत पांडा, आईएएस और कर्नाटक के डब्ल्यूडीडी आयुक्त श्री उपेंद्र प्रताप सिंह (ऑनलाइन) शामिल हुए। इसके अतिरिक्त, ओडिशा और कर्नाटक की राज्य स्तरीय नोडल एजेंसियों के वैज्ञानिकों, आईसीएआर संस्थानों, कृषि विश्वविद्यालयों, आईआईटी, गैर सरकारी संगठनों और कंसोर्टियम भागीदारों सहित लगभग 45 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। बैठक का समन्वय एनआरएए की तकनीकी विशेषज्ञ डॉ. सुसमा सुधिश्री ने किया।
बैठक के दौरान एनआरएए के सीईओ डॉ. चंद्र शेखर कुमार ने रिवार्ड कार्यक्रम के आंकड़ों के आधार पर राष्ट्रीय तकनीकी दिशानिर्देशों (NTG) के मसौदे में किए गए दावों के सत्यापन पर जोर दिया। उन्होंने ओडिशा और कर्नाटक की राज्य सरकारों को वाटरशेड डेटा और निर्णय समर्थन प्रणाली (DSS) को सभी हितधारकों के साथ साझा करने की सलाह दी। आईसीएआर के डॉ. ए के नायक ने वाटरशेड की बेहतर योजना के लिए भूमि संसाधन सूची (LRI) और जल विज्ञान के एकीकरण की आवश्यकता बताई और सुझाव दिया कि परिणामों तक पहुंचने की कार्यप्रणालियों को एनटीजी में स्पष्ट रूप से लिखा जाए तथा वेब पोर्टल जल्द विकसित किए जाएं।
डीओएलआर के संयुक्त सचिव श्री नितिन खाडे ने सुझाव दिया कि कार्यों के कार्यान्वयन के लिए अधिक समय सुनिश्चित करने हेतु डीपीआर (DPR) तैयार करने की अवधि को 6 महीने से घटाकर 3 महीने किया जा सकता है। उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों के अभिसरण के पहलुओं को भी एनटीजी में शामिल करने की बात कही।
बैठक की शुरुआत में डॉ. सुसमा सुधिश्री ने पिछली बैठक की रिपोर्ट और राष्ट्रीय तकनीकी दिशानिर्देशों के दूसरे मसौदे में किए गए संशोधनों को प्रस्तुत किया। उन्होंने राज्य स्तरीय नोडल एजेंसियों से डेटा साझा करने का अनुरोध किया ताकि विश्लेषण और रिपोर्ट तैयार की जा सके। यह विकसित किया जा रहा राष्ट्रीय तकनीकी दिशानिर्देश (NTG), प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना 3.0 के वाटरशेड विकास घटक के तहत देश में भावी पीढ़ी के वाटरशेड विकास के लिए उपयोग किया जाएगा।


