संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में भारत और माली ने मनाया विश्व कपास दिवस, सस्टेनेबिलिटी और पार्टनरशिप पर हुई चर्चा
न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में भारत और माली के स्थायी मिशनों ने 'कॉटन फॉर सस्टेनेबिलिटी' विषय पर एक संयुक्त कार्यक्रम आयोजित किया, जिसमें कपास के जरिए आर्थिक विकास और गरीबी उन्मूलन पर जोर दिया गया।

संयुक्त राष्ट्र में भारत और माली के स्थायी मिशनों ने 7 अक्टूबर 2026 को न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में विश्व कपास दिवस के अवसर पर एक संयुक्त कार्यक्रम का आयोजन किया। इस कार्यक्रम का मुख्य विषय “कॉटन फॉर सस्टेनेबिलिटी: लाइवलीहुड्स, वैल्यू एडीशन एंड पार्टनरशिप” था। उल्लेखनीय है कि संयुक्त राष्ट्र महासभा ने संकल्प 75/318 के माध्यम से 7 अक्टूबर को विश्व कपास दिवस घोषित किया था, जिसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय व्यापार, आर्थिक विकास और विशेष रूप से विकासशील एवं अल्पविकसित देशों में गरीबी उन्मूलन में कपास की भूमिका को उजागर करना है।
कार्यक्रम के दौरान संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत हरीश पर्वतनेनी ने अपने संबोधन में महात्मा गांधी द्वारा कपास और चरखे को आत्मनिर्भरता, गरिमा और स्वतंत्रता संग्राम से जोड़ने का उल्लेख किया। उन्होंने चार प्रमुख प्राथमिकताओं पर जोर दिया: उत्पादकों की आजीविका को समर्थन देना, मूल्य संवर्धन और बाजारों तक पहुंच बढ़ाना, सततता (सस्टेनेबिलिटी) को बढ़ावा देना तथा प्रौद्योगिकी एवं साझेदारियों को मजबूत करना। उन्होंने दक्षिण-दक्षिण और त्रिकोणीय सहयोग की आवश्यकता पर भी बल दिया ताकि कपास उत्पादक देश अधिक मूल्य सृजन कर सकें और सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त कर सकें।
संयुक्त राष्ट्र में माली के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत इस्सा कोनफूरू ने माली की ग्रामीण आजीविका और अर्थव्यवस्था के लिए कपास के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कच्चे माल की लागत, प्रसंस्करण क्षमता की कमी और बाजार तक पहुंच जैसी चुनौतियों का जिक्र किया। उन्होंने भारत को एक प्रमुख साझेदार मानते हुए पारस्परिक रूप से लाभकारी साझेदारियों का स्वागत किया।
इस अवसर पर सांसद असित कुमार मल ने पश्चिम बंगाल के बोलपुर की कांथा कढ़ाई का उदाहरण देते हुए बताया कि पारंपरिक शिल्प कौशल किस प्रकार कपास का मूल्य वर्धन कर महिलाओं की आजीविका को सहारा देता है। वहीं, सांसद एल. के. सुधीश ने तमिलनाडु के सूती निटवियर और परिधान विनिर्माण के अनुभवों को साझा किया और पीएम मित्र पहल के तहत विकसित किए जा रहे एकीकृत वस्त्र पार्कों तथा अपशिष्ट जल के पुन: उपयोग के बारे में जानकारी दी।
भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुश्री पद्मिनी सिंगला ने कपास के प्रमुख उत्पादक और उपभोक्ता के रूप में भारत की भूमिका पर चर्चा की। उन्होंने कपास उत्पादकता मिशन और 'कस्तूरी कॉटन भारत' पहल की जानकारी देते हुए गुणवत्ता, उत्पादकता और सोर्सिंग क्षमता में सुधार पर जोर दिया। उन्होंने वस्त्र अवसंरचना में निवेश और छोटे उद्यमों को सहायता प्रदान करने की आवश्यकता को रेखांकित किया।
इस कार्यक्रम में कोट डी आइवर, उज्बेकिस्तान, चाड, नीदरलैंड, बुर्किना फासो, मिस्र, कैमरून और पेरू के प्रतिनिधियों सहित खाद्य और कृषि संगठन (FAO) और अंतरराष्ट्रीय कपास सलाहकार समिति के विशेषज्ञों ने भी अपने विचार व्यक्त किए। चर्चा का मुख्य केंद्र कपास मूल्य श्रृंखलाओं को मजबूत करना, प्रौद्योगिकी का उपयोग और अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों को प्रगाढ़ करना था। कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों ने भारतीय शिल्पकार के मार्गदर्शन में सूती वस्त्र पर 'पेन कलमकारी' का व्यावहारिक अनुभव भी प्राप्त किया।

