सक्रिय आकाशगंगाओं की ऊर्जा प्रक्रिया समझने में मददगार होंगे ब्लेज़ार से प्राप्त नए एक्स-रे संकेत
एरीज के शोधकर्ताओं ने चार शक्तिशाली ब्लेज़ार का अध्ययन कर यह पाया है कि कम सक्रिय अवस्था के दौरान अभिवृद्धि डिस्क भी एक्स-रे उत्सर्जन में योगदान देती है।

खगोलशास्त्रियों ने ब्रह्मांड के सबसे ऊर्जावान खगोलीय पिंडों में से एक 'ब्लेज़ार' के अध्ययन के माध्यम से एक्स-रे उत्सर्जन के स्रोतों के बारे में महत्वपूर्ण नई जानकारी प्राप्त की है। यह शोध सक्रिय आकाशगंगाओं को ऊर्जा प्रदान करने की प्रक्रिया और उनके आसपास की चरम भौतिक परिस्थितियों को समझने में सहायक हो सकता है।
ब्लेज़ार वास्तव में सक्रिय आकाशगंगाएं हैं, जिनके केंद्र में स्थित अतिविशाल ब्लैक होल (SMBH) इन्हें ऊर्जा देते हैं। जब पदार्थ ब्लैक होल की ओर गिरता है, तो भारी मात्रा में ऊर्जा निकलती है और सापेक्षिक कणों के शक्तिशाली जेट लगभग सीधे पृथ्वी की ओर प्रक्षेपित होते हैं, जिससे ये पिंड असाधारण रूप से चमकीले दिखाई देते हैं। इनमें 'टीईवी ब्लेज़ार' का एक समूह शामिल है, जो टेरा-इलेक्ट्रॉन वोल्ट तक की उच्च-ऊर्जा वाली गामा किरणें उत्पन्न करते हैं।
नैनीताल स्थित विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के स्वायत्त संस्थान, आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान अनुसंधान संस्थान (एरीज) के शोधकर्ताओं ने चार क्लासिकल ब्लेज़ार—एमआरके 421, एमआरके 501, पीजी 1553+113 और पीकेएस 2155-304 का अध्ययन किया। शोधकर्ता रिया भौमिक और आलोक सी. गुप्ता ने नासा की नाइसर (NICER) और न्यूस्टार (NuSTAR) अंतरिक्ष दूरबीनों से प्राप्त 13 सेट एक्स-रे प्रेक्षणों का विश्लेषण किया। जहाँ नाइसर ने कम-ऊर्जा वाली एक्स-रे का और न्यूस्टार ने उच्च-ऊर्जा वाली रेंज का अध्ययन किया।
अध्ययन के दौरान पाया गया कि एमआरके 421 और एमआरके 501 के कुछ प्रेक्षणों में, जब वे मध्यम से कम सक्रिय अवस्था में थे, कम एक्स-रे ऊर्जा पर एक अतिरिक्त घटक दिखाई दिया। यह संकेत देता है कि कम सक्रियता के दौरान जेट के साथ-साथ ब्लैक होल के आसपास की अभिवृद्धि डिस्क (Accretion Disk) से होने वाले उत्सर्जन ने भी एक्स-रे स्पेक्ट्रम में योगदान दिया। एमआरके 421 के लिए ऐसे साक्ष्य पहले भी मिले थे, लेकिन एमआरके 501 के लिए यह पहला संभावित संकेत है, जिसकी पुष्टि के लिए और प्रेक्षणों की आवश्यकता है।
वहीं अन्य दो ब्लेज़ार, पीजी 1553+113 और पीकेएस 2155-304 के प्रेक्षण मानक मॉडल के अनुरूप पाए गए। 'द एस्ट्रोफिजिकल जर्नल' में प्रकाशित यह अध्ययन स्पष्ट करता है कि ब्लेज़ार के एक्स-रे स्पेक्ट्रम में केवल एक विकिरण स्रोत का प्रभुत्व नहीं होता। जब जेट का उत्सर्जन कमजोर होता है, तब अभिवृद्धि प्रवाह के योगदान का पता लगाया जा सकता है। इससे भविष्य में ब्लैक होल और उनके परिवेश के बीच होने वाली अंतःक्रियाओं को समझने में मदद मिलेगी।



