अमित शाह ने विश्व हिंदू परिषद के पूर्व अध्यक्ष अशोक सिंहल के जन्मशताब्दी वर्ष का किया उद्घाटन
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नई दिल्ली में अशोक सिंहल जी की जयंती पर आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए उनके सादगीपूर्ण जीवन और राष्ट्रभक्ति को युवाओं के लिए प्रेरणा बताया।

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने नई दिल्ली में विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के पूर्व अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक सिंहल जी की जयंती के अवसर पर आयोजित जन्मशताब्दी वर्ष के उद्घाटन समारोह को संबोधित किया। इस कार्यक्रम में कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
समारोह को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि अशोक सिंहल का जीवन त्याग, सादगी, उत्कृष्ट राष्ट्रभक्ति, धर्मनिष्ठा और संघर्ष का संगम था। उन्होंने कहा कि अशोक जी विद्यार्थी, स्वयंसेवक और प्रचारक से लेकर विहिप के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष तक के हर पड़ाव पर श्रेष्ठ रहे और अंतिम सांस तक हिंदुत्व को समर्पित जीवन जिया। श्री शाह ने उल्लेख किया कि समृद्ध परिवार में जन्म लेने के बावजूद अशोक जी विहिप कार्यालय के एक छोटे से कक्ष में रहे, जहां उन्होंने अपने जीवन के 20 वर्ष बिताए, जो आज कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणा है।
गृह मंत्री ने बताया कि अशोक सिंहल हिंदू धर्म, वेद, उपनिषद, संस्कृत और संत परंपरा के प्रति गहरा सम्मान रखते थे। उनका मानना था कि हिंदू धर्म का प्रसार इसलिए आवश्यक है क्योंकि यह संपूर्ण ब्रह्मांड के कल्याण की चिंता करता है। श्री शाह ने कहा कि राम जन्मभूमि आंदोलन अशोक जी के जीवन का अभिन्न हिस्सा था। उनका दृढ़ विश्वास था कि गुलामी के कालखंड के चिह्नों को मिटाकर भव्य राम मंदिर का निर्माण होने पर ही भारत का विश्व में गौरवमय स्थान संभव होगा। उन्होंने राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान अशोक सिंहल के संघर्षों और उनके द्वारा झेले गए लाठीचार्ज का भी जिक्र किया।
अमित शाह ने इस बात पर जोर दिया कि जब समाज अपने नायकों को भूल जाता है, तब वैचारिक शून्य पैदा होता है और युवा बाहरी सभ्यताओं में अपने आदर्श खोजने लगते हैं, इसलिए अशोक सिंहल की जन्मशताब्दी मनाना अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 2014 के बाद सरकारों की दिशा बदली और बिना रक्त बहाए प्रभु श्रीराम का भव्य मंदिर निर्मित हुआ, जो दुनिया भर के रामभक्तों के लिए संतोष का विषय है।
इस अवसर पर 11 श्रीराम स्तंभों का डिजिटल लोकार्पण भी किया गया। अमित शाह ने कहा कि ये स्तंभ आने वाली पीढ़ियों तक मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के गुणों और उनके वनगमन मार्ग का संदेश पहुंचाते रहेंगे। कार्यक्रम के दौरान रविदास जी और वाल्मीकि मंदिर में पूजन, प्रयागराज में गंगा आरती, गंगा संरक्षण, गौमाता की सेवा, रामसेतु आंदोलन की स्मृति और अयोध्या में कृत्रिम अंगदान जैसे सेवा प्रकल्पों की प्रस्तुति भी दी गई।
