एशियाई खेल 2026: आइची-नागोया में भारत ने जीते 21 स्वर्ण सहित कुल 85 पदक
जापान के आइची-नागोया में आयोजित 20वें एशियाई खेलों में भारत ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 85 पदक हासिल किए, जिनमें 21 स्वर्ण पदक शामिल हैं।

जापान के आइची-नागोया में 19 सितंबर से 4 अक्टूबर, 2026 तक आयोजित 20वें एशियाई खेलों में भारत ने अपनी खेल प्रतिभा का दमदार प्रदर्शन किया। 'एक एशिया की कल्पना' के आधिकारिक नारे के साथ आयोजित इन खेलों में भारत ने कुल 85 पदक जीते, जिनमें 21 स्वर्ण, 27 रजत और 37 कांस्य पदक शामिल हैं।
भारत के स्वर्ण पदकों की तालिका में तीरंदाजी सबसे आगे रहा, जिसने 5 स्वर्ण पदक जीते। इसके बाद शूटिंग और मुक्केबाजी ने 3-3 स्वर्ण पदक हासिल किए। टीम स्पर्धाओं में भारत का दबदबा रहा, जहाँ क्रिकेट, हॉकी और कबड्डी में प्रत्येक खेल में 2-2 स्वर्ण पदक जीते गए। पुरुष क्रिकेट टीम ने फाइनल में पाकिस्तान को 19 रनों से हराया, जबकि पुरुष हॉकी टीम ने मलेशिया को 5-1 से हराकर अपना खिताब बरकरार रखा। इसके अलावा कुश्ती (2), एथलेटिक्स (1) और गोल्फ (1) में भी भारत को स्वर्ण पदक मिले।
भारत ने इस आयोजन के लिए अपना अब तक का सबसे बड़ा प्रतिनिधिमंडल भेजा था, जिसमें 36 खेल स्पर्धाओं में 501 एथलीट शामिल थे। इस दल में 300 से अधिक खिलाड़ी ऐसे थे जिन्होंने पहली बार एशियाई खेलों में पदार्पण किया। उद्घाटन समारोह में ओलंपिक पदक विजेता मनु भाकर और कबड्डी खिलाड़ी पवन सेहरावत ने भारतीय दल की परेड का नेतृत्व किया।
एशियाई खेलों के साथ-साथ जापान 18 से 24 अक्टूबर, 2026 तक 5वें एशियाई पैरा खेलों की भी मेजबानी कर रहा है, जिसमें भारतीय पैरालंपिक समिति के माध्यम से भारत हिस्सा लेगा। यह एशियाई पैरा खेलों में भारत की पांचवीं उपस्थिति होगी।
भारत की इस खेल यात्रा को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने 1 जुलाई, 2025 को 'खेलो भारत नीति' शुरू की है, जिसका लक्ष्य 2036 ओलंपिक में उत्कृष्टता प्राप्त करना है। केंद्रीय बजट 2026-27 में खेल मंत्रालय को रिकॉर्ड 4,479.88 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। साथ ही, सरकार ने देश भर में खेल बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए 36,000 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश वाली दस साल की योजना तैयार की है।
उल्लेखनीय है कि एशियाई खेलों का इतिहास भारत से ही जुड़ा है, जिसकी शुरुआत 1951 में नई दिल्ली में हुई थी। प्रो. जी.डी. सोंधी द्वारा परिकल्पित इन खेलों का उद्देश्य द्वितीय विश्व युद्ध के बाद एशियाई देशों के बीच एकता और संबंधों को पुनर्निर्मित करना था।
