कपड़ा मंत्रालय ने परिधान और मेड-अप्स निर्यात के लिए RoSCTL योजना को 31 दिसंबर 2026 तक बढ़ाया
भारत सरकार के कपड़ा मंत्रालय ने परिधान और मेड-अप्स निर्यात को बढ़ावा देने वाली RoSCTL योजना का विस्तार 31 दिसंबर 2026 तक कर दिया है।

कपड़ा मंत्रालय ने परिधानों (गारमेंट्स) और मेड-अप्स के निर्यात के लिए लागू आरओएससीटीएल (RoSCTL) योजना की अवधि को 1 अक्टूबर से 31 दिसंबर 2026 तक तीन महीने के लिए बढ़ा दिया है। यह विस्तार मौजूदा दरों और प्रचलित दिशानिर्देशों के तहत किया गया है।
यह योजना 7 मार्च 2019 से प्रभावी है। इसके अंतर्गत निर्यातकों को उन पात्र छिपे हुए राज्य और केंद्रीय करों व शुल्कों से छूट प्रदान की जाती है, जिनका रिफंड अन्य माध्यमों से उपलब्ध नहीं होता है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य निर्यात को 'जीरो-रेटिंग' देना है, ताकि घरेलू कर निर्यातित उत्पादों पर वित्तीय बोझ न बनें और वैश्विक बाजार में भारत के परिधान एवं मेड-अप्स क्षेत्र की प्रतिस्पर्धात्मकता मजबूत हो सके।
आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025-26 के दौरान इस योजना का लाभ 444 से अधिक जिलों के 15,400 से अधिक निर्यातकों को मिला है, जिनमें मुख्य रूप से एमएसएमई (MSME) शामिल हैं। योजना की यह व्यापक भौगोलिक पहुंच विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को समर्थन देने और वैश्विक बाजारों में छोटे व मध्यम निर्यातकों की भागीदारी बढ़ाने में सहायक रही है।
मंत्रालय के अनुसार, इस विस्तार से निर्यातकों के लिए नीतिगत निरंतरता और पूर्वानुमान सुनिश्चित होगा। साथ ही, यह प्रतिस्पर्धी वैश्विक व्यापारिक माहौल में भारत के श्रम-प्रधान और मूल्य-वर्धित परिधान व मेड-अप्स क्षेत्र की मजबूती को बनाए रखने में मदद करेगा।

