केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने उद्योग हितधारकों के साथ व्यापार सुधार और एफटीए के अवसरों पर किया संवाद
नई दिल्ली में आयोजित कार्यशाला में केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने निर्यात सुविधा को मजबूत करने के लिए एकीकृत कार्यालयों और 'ट्रेड कनेक्ट' प्लेटफॉर्म जैसी डिजिटल पहलों पर जोर दिया।

उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) ने नई दिल्ली के भारत मंडपम में 'ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस', मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के अवसरों और व्यापार-संबंधी सुधारों पर एक हितधारक कार्यशाला का आयोजन किया। इस अवसर पर केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने उद्योग प्रतिनिधियों के साथ एक संवादात्मक सत्र में भाग लिया।
संवाद के दौरान केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने भौतिक और डिजिटल तंत्रों के माध्यम से निर्यात सुविधा को मजबूत करने के सरकार के दृष्टिकोण को साझा किया। उन्होंने बताया कि प्रमुख शहरों में एकीकृत वाणिज्य और उद्योग कार्यालय स्थापित करने की परिकल्पना की गई है, ताकि व्यवसायों को विभिन्न विभागों और एजेंसियों तक पहुँचने के लिए एक ही सामान्य केंद्र मिल सके। इसके अतिरिक्त, उन्होंने जिला और राज्य स्तर पर निर्यातकों की सहायता के लिए क्षेत्रीय भाषाओं के ज्ञान रखने वाले लगभग 1,000 प्रशिक्षित स्थानीय कर्मियों के एक प्रस्तावित नेटवर्क की घोषणा की।
निर्यातकों की सुविधा के लिए श्री गोयल ने 'ट्रेड कनेक्ट' प्लेटफॉर्म की जानकारी दी। इस प्लेटफॉर्म को उत्पाद-वार और एचएसएन-कोड-वार जानकारी प्रदान करने के लिए विकसित किया जा रहा है, जिसमें गंतव्य देशों के टैरिफ, एफटीए के अवसर और लाभ प्राप्त करने की प्रक्रियाएं शामिल होंगी। इसमें डिजिटल और एआई-सक्षम टूल का उपयोग कर संभावित निर्यात अवसरों और बुनियादी ढांचे की कमियों की पहचान करने का प्रावधान है।
कार्यशाला में रोलर चेन और औद्योगिक कंपोनेंट निर्माण क्षेत्र ने बताया कि गुणवत्ता नियंत्रण आदेश (क्यूसीओ), न्यूनतम आयात मूल्य (एमआईपी) और उच्च आयात शुल्क जैसे नीतिगत हस्तक्षेपों से इस क्षेत्र में 15 गुना विस्तार हुआ है। इससे लगभग 500 करोड़ रुपये का नया निवेश आया है और करीब 5,000 नई नौकरियों का सृजन हुआ है।
इस कार्यक्रम में फार्मास्यूटिकल्स, टेक्सटाइल, ऑटोमोटिव, इंजीनियरिंग और लॉजिस्टिक्स सहित विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधियों, एमएसएमई और महिला उद्यमियों ने भाग लिया। उन्होंने निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता, व्यापार दस्तावेज़ीकरण, विनियामक प्रक्रियाओं और एफटीए के उपयोग से संबंधित मुद्दे उठाए। उद्योग प्रतिनिधियों ने सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन के डिजिटल ट्रांसमिशन और सत्यापन जैसी प्रणालियों के विस्तार तथा विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी), कस्टम्स और बैंकों के बीच बेहतर एकीकरण की आवश्यकता पर जोर दिया।
डीपीआईआईटी के अधिकारियों ने स्टार्टअप इंडिया, बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर), निवेश सुविधा, राष्ट्रीय एकल खिड़की प्रणाली और पेट्रोलियम एवं विस्फोटक सुरक्षा संगठन (पीईएसओ) से संबंधित सुधारों पर प्रस्तुतीकरण दिया। चर्चा का मुख्य उद्देश्य विनियामक प्रक्रियाओं का सरलीकरण, डिजिटलीकरण और अनुपालन के बोझ को कम करना रहा।
