केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे. पी. नड्डा ने की मध्य प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा, पीपीपी मॉडल की सराहना की
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे. पी. नड्डा ने मुख्यमंत्री मोहन यादव के साथ बैठक कर राज्य में चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे में हुए सुधारों की समीक्षा की।

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जे. पी. नड्डा ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री मोहन यादव से मुलाकात कर राज्य के स्वास्थ्य क्षेत्र में हुई प्रगति की समीक्षा की। इस बैठक के दौरान स्वास्थ्य सेवा बुनियादी ढांचे, चिकित्सा शिक्षा, विशेषज्ञ सेवाओं और प्रमुख जन स्वास्थ्य पहलों पर विस्तृत चर्चा की गई।
श्री नड्डा ने राज्य सरकार द्वारा गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच बढ़ाने और चिकित्सा शिक्षा के विस्तार के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल अपनाने के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने बताया कि इस अभिनव मॉडल के तहत धार, पन्ना, कटनी और बैतूल में मेडिकल कॉलेज स्थापित किए जा रहे हैं, जिन्हें दिसंबर 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है।
चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में मध्य प्रदेश ने महत्वपूर्ण प्रगति की है। वर्ष 2026 में एमबीबीएस सीटों की संख्या 5,600 से बढ़ाकर 6,120 कर दी गई है, जिसमें एक वर्ष में 520 सीटों की वृद्धि हुई है। इसके अलावा, सुपर-स्पेशियलिटी शिक्षा का भी विस्तार किया गया है, जिसके तहत सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सीटें 63 से बढ़कर 73 और निजी कॉलेजों में 29 से बढ़कर 53 हो गई हैं।
बैठक में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य संकेतकों में सुधार की भी समीक्षा की गई। एसआरएस 2022-24 के आंकड़ों के अनुसार, राज्य में मातृ मृत्यु अनुपात (एमएमआर) में 7 अंकों की कमी आई है और यह प्रति लाख जीवित जन्मों पर 135 हो गया है। एनएफएचएस-6 के अनुसार, चार या अधिक प्रसवपूर्व जांच कराने वाली गर्भवती महिलाओं का अनुपात 57.5% से बढ़कर 69.5% हो गया है। शिशु स्वास्थ्य में भी सुधार देखा गया है, जहाँ नवजात मृत्यु दर 27 से घटकर 26 और शिशु मृत्यु दर 37 से घटकर 35 (प्रति 1,000 जन्मे बच्चे) हो गई है।
विशेषज्ञ सेवाओं के विस्तार के तहत राज्य के 52 जिलों में 70 हेमोडायलिसिस इकाइयां और 52 कैंसर डे-केयर केंद्र संचालित हैं। इंदौर के सरकारी महात्मा गांधी स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय में सीएआर-टी सेल थेरेपी जैसी उन्नत कैंसर उपचार सुविधाएं भी शुरू की गई हैं।
बुनियादी ढांचे के विकास की बात करें तो छतरपुर, दमोह और बुधनी में मेडिकल कॉलेज भवनों का निर्माण पूरा हो चुका है। उज्जैन में निर्माण कार्य 2027 तक पूरा होने की उम्मीद है, जबकि केंद्र सरकार की फेज-III योजना के तहत राजगढ़ और मंडला में मेडिकल कॉलेज प्रस्तावित हैं।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने स्वास्थ्य सेवाओं को किफायती और सुलभ बनाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार के बीच निरंतर सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया। बैठक में केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव श्रीमती पुण्य सलिला श्रीवास्तव, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव श्री सुखवीर सिंह, अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री नीरज मंडलोई और राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (एनएचए) के सीईओ डॉ. सुनील कुमार बर्नवाल उपस्थित थे।
