खादी और ग्राम उद्योग: ग्रामीण आजीविका और महिला सशक्तीकरण का सशक्त माध्यम
खादी और ग्राम उद्योग ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन, महिला सशक्तीकरण और सतत विकास के माध्यम से आत्मनिर्भर भारत के विजन को मजबूत कर रहे हैं।

खादी और ग्राम उद्योग (KVI) भारत में ग्रामीण आजीविका को बढ़ावा देने और रोजगार सृजन के माध्यम से आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। भारत की सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी खादी पारंपरिक शिल्प कौशल को सतत उत्पादन पद्धतियों के साथ जोड़कर ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक अवसर प्रदान कर रही है। यह क्षेत्र विशेष रूप से सतत विकास लक्ष्य 1 (गरीबी उन्मूलन) और सतत विकास लक्ष्य 8 (सभ्य कार्य और आर्थिक विकास) के उद्देश्यों का समर्थन करता है।
खादी और ग्राम उद्योग आयोग (KVIC) ने कौशल विकास और क्षमता निर्माण के माध्यम से संस्थानों को सहयोग दिया है। अप्रैल 2025 से कताई और बुनाई की मजदूरी में वृद्धि, बेहतर कार्य उपकरणों के प्रावधान और मजबूत विपणन हस्तक्षेपों ने कारीगरों की आय में सुधार किया है।
खादी अब आधुनिक फैशन का हिस्सा बन गई है। खादी डेनिम, डिजाइनर साड़ियां, ब्राइडल वियर और आधुनिक शर्ट जैसी श्रेणियों ने युवाओं में इसकी लोकप्रियता बढ़ाई है। दिल्ली स्थित NIFT के खादी उत्कृष्टता केंद्र ने 2,129 डिजाइन संग्रह विकसित किए हैं, जबकि 'नवयुग खादी' और योग वियर संग्रह 'स्वधा' के लॉन्च ने इसकी आधुनिक छवि को मजबूत किया है।
सरकार खादी विकास योजना, ग्रामोद्योग विकास योजना और प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) के जरिए वित्तीय सहायता, प्रशिक्षण और सामाजिक सुरक्षा प्रदान कर रही है। अहमदाबाद स्थित EDII के एक मूल्यांकन अध्ययन के अनुसार, इन योजनाओं से जुड़े 75 प्रतिशत से अधिक कारीगरों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
महिला सशक्तीकरण के क्षेत्र में खादी एक प्रभावी माध्यम साबित हुई है। लगभग पांच लाख खादी कारीगरों में से करीब 80 प्रतिशत महिलाएं हैं। अगरबत्ती, हस्तनिर्मित कागज और शहद उद्योग जैसे क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी उन्हें आर्थिक स्वतंत्रता प्रदान कर रही है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खादी को पहचान दिलाने के लिए न्यूयॉर्क स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास के व्यापार पोर्टल पर निर्यात संवर्धन परिषद (EPC) के रूप में पंजीकरण कराया गया है। इसके साथ ही, पोंडुरु खादी को जीआई टैग मिलने से इसकी विशिष्टता और मूल्य में वृद्धि की उम्मीद है। आगरा में आयोजित पहले ब्रिक्स एमएसएमई फोरम में पोंडुरु खादी, भारत कस्तूरी कपास और बंगाल मलमल का प्रदर्शन किया गया।
तकनीकी उन्नयन के तहत KVIC के सेंट्रल स्लीवर प्लांट का आधुनिकीकरण किया जा रहा है। कर्नाटक के चित्तदुर्ग और केरल के कुत्तूर स्थित संयंत्र परिचालन में आ चुके हैं। चित्तदुर्ग संयंत्र अपनी 50 प्रतिशत ऊर्जा आवश्यकता के लिए सौर ऊर्जा का उपयोग कर रहा है। इसके अलावा, ग्राम उद्योग समूहों के लिए प्रौद्योगिकी आधारित साझा सुविधा केंद्रों के निर्माण का प्रस्ताव है।
पर्यावरणीय स्थिरता की दिशा में KVIC, ICAR-CIRCOT के सहयोग से प्राकृतिक रूप से रंगीन कपास की किस्में विकसित कर रहा है, ताकि रासायनिक प्रदूषण और जल की खपत को कम किया जा सके। यह पहल सतत विकास लक्ष्य 12 (जिम्मेदार उपभोग और उत्पादन) और सतत विकास लक्ष्य 13 (जलवायु कार्रवाई) में योगदान देने की क्षमता रखती है।


