चिंतन शिविर 2026 का समापन: उच्च गुणवत्ता वाली सड़क अवसंरचना के लिए केंद्र और राज्यों के बीच सहयोग पर जोर
गुजरात के एकता नगर में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन में सड़क अवसंरचना के विकास के लिए ज्ञान-साझाकरण और संस्थागत क्षमता निर्माण पर चर्चा की गई।

गुजरात के एकता नगर स्थित स्टैच्यू ऑफ यूनिटी में दो दिवसीय “चिंतन शिविर 2026 – राजमार्ग अवसंरचना पर राष्ट्रीय सम्मेलन” का समापन हुआ। इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य गुणवत्तापूर्ण सड़क अवसंरचना के विकास के लिए केंद्र और राज्यों के बीच सहयोग को मजबूत करना, जमीनी अनुभवों को साझा करना और संस्थागत क्षमता निर्माण को बढ़ावा देना था।
समापन सत्र को संबोधित करते हुए सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के सचिव श्री वी. उमाशंकर ने कहा कि इस चिंतन शिविर ने राजमार्ग और सड़क क्षेत्र के सभी संबंधित पक्षों के बीच एक साझा समुदाय विकसित करने का अवसर प्रदान किया है। उन्होंने जोर दिया कि 'विकसित भारत' के विजन को साकार करने के लिए शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों, राज्य राजमार्गों, राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे सहित सभी स्तरों पर उच्च गुणवत्ता वाली सड़कों की आवश्यकता है, क्योंकि अब ध्यान तेजी से बुनियादी ढांचे की गुणवत्ता की ओर स्थानांतरित हो रहा है।
सम्मेलन की चर्चाओं में यह बात सामने आई कि राज्यों को राष्ट्रीय स्तर पर विकसित तकनीकी प्लेटफॉर्मों का लाभ उठाया जा सकता है। इसमें पीएम गतिशक्ति, डेटा लेक, ई-डीएआर (eDAR), ठेकेदार रेटिंग प्रणाली और भूमि राशि (Bhoomi Rashi) जैसे प्लेटफॉर्म शामिल हैं। श्री उमाशंकर ने बताया कि राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क के लिए उपयोग किए जा रहे एआई (AI) आधारित ई-डीएआर प्लेटफॉर्म का उपयोग राज्य और स्थानीय सड़कों पर दुर्घटनाओं के पैटर्न के विश्लेषण और सड़क सुरक्षा सुधार के लिए किया जा सकता है, बशर्ते आवश्यक डेटा उपलब्ध हो।
निर्माण क्षेत्र के पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए सम्मेलन में व्यावसायिकता, कौशल विकास और बेहतर पर्यवेक्षण की आवश्यकता पर चर्चा की गई। सचिव ने निर्माण श्रमिकों के लिए लक्षित कौशल विकास और डीपीआर सलाहकारों, प्राधिकरण अभियंताओं तथा स्वतंत्र अभियंताओं के चयन और प्रदर्शन मूल्यांकन प्रक्रिया को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि परियोजनाओं के परिणाम बेहतर हों।
इसके अतिरिक्त, राज्य राजमार्गों और एक्सप्रेसवे के विकास के लिए मॉडल कन्सेशन एग्रीमेंट, बीओटी (BOT) और एन्युटी आधारित जैसे नवीन अनुबंध और वित्तपोषण तंत्र अपनाने की संभावनाओं पर भी विचार किया गया। श्री उमाशंकर ने राज्यों से आह्वान किया कि वे अपने स्तर पर भी चिंतन शिविर और कार्यशालाएं आयोजित करें ताकि विशेषज्ञों के माध्यम से सफल कार्यप्रणालियों को व्यापक स्तर पर अपनाया जा सके।
दो दिवसीय सम्मेलन के दौरान पीएम गतिशक्ति, एकीकृत अवसंरचना योजना, भूमि अधिग्रहण, सुरक्षित राजमार्ग डिजाइन, हरित राजमार्ग, सड़क सुरक्षा, टोल सुधार और परियोजना निगरानी जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर केंद्रित सत्र आयोजित किए गए। इन सत्रों के माध्यम से केंद्र और राज्यों के बीच संवाद स्थापित कर कार्यान्वयन की चुनौतियों के व्यावहारिक समाधानों की पहचान की गई।



