पीएम ई-ड्राइव योजना: ग्लोबल ऑटोमोटिव रिसर्च सेंटर ने अपनी परीक्षण क्षमताओं का किया विस्तार
चेन्नई स्थित ग्लोबल ऑटोमोटिव रिसर्च सेंटर (जीएआरसी) पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत इलेक्ट्रिक और उन्नत वाहन प्रौद्योगिकियों के लिए अपनी परीक्षण अवसंरचना को अपग्रेड कर रहा है।

भारी उद्योग मंत्रालय के राष्ट्रीय ऑटोमोटिव बोर्ड के अंतर्गत चेन्नई के ओरगडम में स्थित ग्लोबल ऑटोमोटिव रिसर्च सेंटर (जीएआरसी) अब अपनी परीक्षण क्षमताओं को और अधिक विस्तार दे रहा है। जीएआरसी वर्तमान में केंद्रीय मोटर वाहन नियमों के नियम 126 के तहत एक अधिकृत परीक्षण एजेंसी के रूप में कार्यरत है, जहाँ वाहनों और उनके कल-पुर्जों का परीक्षण, अनुसंधान एवं विकास, होमोलोगेशन और प्रमाणन किया जाता है।
भारत सरकार की 'प्रधानमंत्री इलेक्ट्रिक ड्राइव रिवोल्यूशन इन इनोवेटिव व्हीकल एन्हांसमेंट' (पीएम ई-ड्राइव) योजना के माध्यम से जीएआरसी अपनी परीक्षण अवसंरचना को उन्नत कर रहा है। पीएम ई-ड्राइव योजना के लिए कुल 10,900 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है, जिसमें से 780 करोड़ रुपये विशेष रूप से परीक्षण एजेंसियों के उन्नयन के लिए आवंटित किए गए हैं। यह योजना 31 मार्च 2028 तक प्रभावी रहेगी।
जीएआरसी को इस परियोजना के लिए 221.13 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं और अधिकांश प्रस्तावित उपकरणों के लिए खरीद आदेश जारी किए जा चुके हैं। केंद्र में स्थापित और उन्नत की जा रही प्रमुख सुविधाओं में शामिल हैं: - एआईएस-156 मानकों के अनुसार इलेक्ट्रिक वाहन और ईवी बैटरी परीक्षण सुविधा - एआईएस-004 पार्ट 3 रिवाईज्ड.1 के तहत ईवी ईएमआई/ईएमसी परीक्षण सुविधा - भारी वाणिज्यिक वाहन परीक्षण सुविधा - पावरट्रेन लैब का आधुनिकीकरण - डमी और डमी कैलिब्रेशन उपकरणों के साथ उन्नत पैसिव सेफ्टी परीक्षण सुविधा - सॉफ्ट टारगेट और आवश्यक उपकरणों के साथ एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम (एडीएएस) परीक्षण सुविधा - ऑटोमोटिव कल-पुर्जों के परीक्षण की सुविधा
संस्थान ने उपकरणों की स्थापना का कार्य शुरू कर दिया है। इसमें एक महत्वपूर्ण हाई स्पीड और हाई रिजॉल्यूशन इमेजिंग सिस्टम शामिल है, जिसमें यूएचडी-4के कैमरे (750 एफपीएस) और फुल एचडी रिकॉर्डिंग (3,000 एफपीएस) की क्षमता है। यह प्रणाली फ्रंटल, साइड और रियर क्रैश टेस्ट के दौरान वाहन के डिफ्लेक्शन, यात्रियों की गतिविधियों और एयरबैग खुलने जैसी घटनाओं को रिकॉर्ड करेगी, जिससे सुरक्षा विश्लेषण और होमोलोगेशन प्रक्रिया अधिक प्रभावी होगी।
पीएम ई-ड्राइव योजना के सहयोग से विकसित यह बुनियादी ढांचा इलेक्ट्रिक वाहनों, बैटरियों, एडीएएस और भारी वाणिज्यिक वाहनों के लिए भारत की स्वदेशी परीक्षण और प्रमाणन क्षमताओं को मजबूत करेगा, जिससे भारतीय ऑटोमोटिव उद्योग वैश्विक स्तर पर अधिक प्रतिस्पर्धी बन सकेगा।


