बस्तर में 9वीं राष्ट्रीय समीक्षा कार्यशाला का आयोजन, सहकारिता क्षेत्र के सुदृढ़ीकरण और 'सहकार से समृद्धि' विजन पर मंथन
सहकारिता मंत्रालय ने छत्तीसगढ़ के बस्तर में दो दिवसीय राष्ट्रीय समीक्षा कार्यशाला आयोजित की, जिसका उद्देश्य सहकारी संस्थाओं को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और आर्थिक रूप से सक्षम बनाना है।

सहकारिता मंत्रालय द्वारा 8 और 9 अक्टूबर 2026 को छत्तीसगढ़ के बस्तर में ‘सहकार से समृद्धि — आगे की राह: सहकारिता रूपांतरण से व्यापक प्रभाव की ओर’ विषय पर 9वीं राष्ट्रीय समीक्षा कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य सहकारिता क्षेत्र में चल रही प्रमुख पहलों की प्रगति की समीक्षा करना, राज्यों के सफल अनुभवों को साझा करना और आगामी तीन महीनों के लिए एक परिणामोन्मुखी कार्ययोजना तैयार करना है।
कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में सहकारिता मंत्रालय के सचिव डॉ. आशीष कुमार भूटानी ने बताया कि केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने स्वयं बस्तर जिले में इस कार्यशाला के आयोजन का सुझाव दिया था, क्योंकि यह क्षेत्र लंबे समय तक वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित रहा है। डॉ. भूटानी ने सहकारी संस्थाओं में लोकतांत्रिक व्यवस्था, पारदर्शिता, जवाबदेही और प्रभावी सुशासन को मजबूत करने का आह्वान किया।
सहकारी बैंकिंग पर चर्चा करते हुए सचिव ने कहा कि सहकारी बैंकों की स्वायत्तता के साथ उनकी जवाबदेही और प्रभावी निगरानी अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने राज्यों के सहकारिता पंजीयकों से इस दिशा में अधिक सक्रिय भूमिका निभाने का आग्रह किया ताकि पूरे सहकारी क्षेत्र की विश्वसनीयता बनी रहे। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि मंत्रालय भारतीय रिजर्व बैंक के साथ समन्वय कर रहा है ताकि सहकारी बैंकों की संसाधन जुटाने की क्षमता बढ़ाई जा सके और किसानों को रियायती दरों पर वित्तीय सहायता मिल सके।
वित्तीय संसाधनों के संबंध में डॉ. भूटानी ने बताया कि राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (NCDC) अधिनियम में हालिया संशोधन के बाद अब उन संस्थाओं को भी वित्तीय सहायता मिल सकेगी जो स्वयं सहकारी संस्थाएं नहीं हैं, लेकिन सहकारी विकास को बढ़ावा देती हैं। इसके अलावा, सहकारी उत्पादों के विपणन के लिए एक साझा डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित करने के प्रस्ताव पर चर्चा की गई, जिसमें ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ONDC) ने सहयोग की पेशकश की है।
कार्यशाला के दौरान प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS), डेयरी सहकारी संस्थाओं, डिजिटलीकरण और व्यवसाय विविधीकरण पर विशेष ध्यान दिया गया। NCEL, NCOL और BBSSL जैसी राष्ट्रीय सहकारी संस्थाओं के माध्यम से निर्यात, जैविक उत्पादों और बीज क्षेत्र में मजबूत मूल्य श्रृंखलाओं के विकास पर विचार-विमर्श किया गया।
छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव श्री विकास शील ने प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए सहकारिता क्षेत्र के विकास के लिए राज्य सरकार के पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया। कार्यशाला के पहले दिन बहुउद्देशीय PACS का गठन, कम्प्यूटरीकरण और विश्व की सबसे बड़ी अन्न भंडारण योजना जैसी प्रमुख उपलब्धियों की समीक्षा की गई।

