भारत अंतरराष्ट्रीय जल सप्ताह 2026: जलवायु लचीलापन और जल वित्तपोषण पर मंथन, भारत और नीदरलैंड्स के बीच हुए अहम समझौते
9वें भारत अंतरराष्ट्रीय जल सप्ताह के तीसरे दिन जलवायु जोखिम, ग्लेशियल झील निगरानी और जल अवसंरचना के वित्तपोषण पर चर्चा हुई। इस अवसर पर भारत और नीदरलैंड्स के बीच तकनीकी सहयोग के लिए दो त्रिपक्षीय समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए।

नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित 9वें भारत अंतरराष्ट्रीय जल सप्ताह 2026 के तीसरे दिन तकनीकी सत्रों और रणनीतिक चर्चाओं का सिलसिला जारी रहा। इस दिन का मुख्य केंद्र जलवायु जोखिम का आकलन, शीघ्र चेतावनी प्रणाली (अर्ली वार्निंग), ग्लेशियल झील की निगरानी, जल उपयोग दक्षता और इनोवेटिव फाइनेंसिंग जैसे महत्वपूर्ण विषय रहे।
इस आयोजन के दौरान भारत और नीदरलैंड्स के बीच द्विपक्षीय सहयोग को मजबूती मिली। जल शक्ति मंत्री श्री सी.आर. पाटिल और नीदरलैंड्स के अवसंरचना और जल प्रबंधन उप-मंत्री श्री जाप स्लूटमेकर के बीच बैठक हुई, जिसमें जल शक्ति मंत्रालय के राज्य मंत्री श्री राज भूषण चौधरी और श्री ईश्वरसिंह पटेल सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। इस दौरान दो महत्वपूर्ण त्रिपक्षीय समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। पहला समझौता तकनीकी सहायता के लिए सेंट्रल वॉटर कमीशन (CWC), गुजरात सरकार के कल्पसर विभाग और नीदरलैंड्स के डेल्टारेस के बीच हुआ। दूसरा समझौता क्षमता विकास और प्रशिक्षण के लिए CWC, कल्पसर विभाग और नीदरलैंड्स के टीयू डेल्फ़्ट के बीच किया गया। इन समझौतों का उद्देश्य परियोजना प्लानिंग और डिज़ाइन में डच विशेषज्ञता और उन्नत इंजीनियरिंग प्रथाओं का लाभ उठाना है।
विभिन्न फोरम के माध्यम से जल प्रबंधन के विविध पहलुओं पर चर्चा की गई। कंट्री फोरम में विश्व बैंक के साथ मिलकर शहरी जल और सिंचाई में निजी निवेश जुटाने पर मंथन हुआ। वॉटर लीडर्स फोरम में स्मार्ट मीटरिंग और क्लाइमेट रिस्क असेसमेंट जैसे विषयों पर चर्चा हुई, जिसमें ICHARM (जापान), आईआईटी बॉम्बे और आईआईएससी बैंगलोर जैसी संस्थाओं ने भाग लिया। वहीं, प्रैक्टिशनर्स फोरम में पारंपरिक जल संस्कृति को आधुनिक जलवायु-अनुकूल प्रबंधन से जोड़ने और अंतर-राज्यीय नदी जल विवादों के समाधान के लिए वैकल्पिक तंत्रों की समीक्षा की गई।
थीमैटिक फोरम के दौरान 'हिम झील नेत्र' (HIM JHEEL NETRA) जैसी स्वदेशी ग्लेशियर-झील निगरानी प्रणाली और एआई-आधारित डेटा गवर्नेंस जैसे शोध पत्र पेश किए गए। इनोवेटिव फाइनेंसिंग मॉडल के तहत ग्रीन फाइनेंस और वॉटर यूज़र चार्ज की नीतियों पर चर्चा की गई।
युवाओं और शिक्षा जगत की भागीदारी को प्रोत्साहित करने के लिए स्टार्ट-अप फोरम का आयोजन किया गया, जिसमें एमएसएमई और एकेडेमिया ने जल प्रबंधन के समाधान पेश किए। एआईसीटीई के सहयोग से शुरू की गई 'जल सेवा अध्ययन' पहल के तहत 49 टीमों ने देश के 132 गांवों का दौरा कर जमीनी अनुभव प्राप्त किया। जल शक्ति मंत्री श्री सी.आर. पाटिल ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि जल जीवन मिशन केवल बुनियादी ढांचे का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह स्वास्थ्य, सम्मान और महिला सशक्तिकरण से जुड़ी एक परिवर्तनकारी पहल है। उन्होंने युवाओं से जल क्षेत्र के लिए किफायती तकनीकी समाधान विकसित करने का आग्रह किया।


