भारत-ईएफटीए टीईपीए समझौता भारतीय निर्यात के लिए बड़ा अवसर, 99.6% निर्यात को मिलेगी व्यापक बाजार पहुंच: वाणिज्य सचिव
वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने भारतीय निर्यातकों से भारत-ईएफटीए व्यापार एवं आर्थिक साझेदारी समझौते (TEPA) के लाभ उठाने और गुणवत्तापूर्ण उत्पादों के जरिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में पैठ बनाने का आह्वान किया है।

वाणिज्य सचिव श्री राजेश अग्रवाल ने नई दिल्ली में आयोजित प्रमुख निर्यातकों के आउटरीच कार्यक्रम में भारत-यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (EFTA) के साथ व्यापार एवं आर्थिक साझेदारी समझौते (TEPA) के तहत उपलब्ध अवसरों के उपयोग को बढ़ावा देने की बात कही। यह कार्यक्रम वाणिज्य विभाग द्वारा आयोजित 'द्वितीय भारत-ईएफटीए समृद्धि शिखर सम्मेलन 2026' का हिस्सा था। गौरतलब है कि यह टीईपीए समझौता 1 अक्टूबर 2025 को लागू हुआ था।
श्री अग्रवाल ने बताया कि ईएफटीए के चारों सदस्य देशों—आइसलैंड, लिकटेंस्टीन, नॉर्वे और स्विट्जरलैंड—ने भारत के लिए अपने बाजार खोल दिए हैं। ईएफटीए की प्रतिबद्धताएं इसकी 92.2 प्रतिशत टैरिफ लाइनों को कवर करती हैं, जो भारत के कुल निर्यात का 99.6 प्रतिशत है, जिसमें गैर-कृषि उत्पाद भी पूरी तरह शामिल हैं। वहीं, भारत की प्रतिबद्धताएं 82.7 प्रतिशत टैरिफ लाइनों को कवर करती हैं, जो ईएफटीए निर्यात का 95.3 प्रतिशत है।
वाणिज्य सचिव ने जोर देकर कहा कि यह समझौता केवल शुल्कों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यवसायों के लिए पूर्वानुमान और स्थिरता प्रदान करता है। उन्होंने भारतीय कंपनियों से आग्रह किया कि वे ईएफटीए देशों के व्यवसायों के साथ साझेदारी करें और कच्चे माल से लेकर अंतिम उत्पादों तक संयुक्त मूल्य श्रृंखलाएं (Value Chains) विकसित करें। उन्होंने कहा कि ईएफटीए देश उच्च आय वाले बाजार हैं जो गुणवत्ता को महत्व देते हैं, और यहां सफल होने का अर्थ है किसी भी वैश्विक बाजार के लिए तैयार होना।
कृषि क्षेत्र पर चर्चा करते हुए श्री अग्रवाल ने कहा कि इन उच्च खपत वाले बाजारों में कृषि निर्यात के बड़े अवसर हैं, क्योंकि कई उत्पादों पर शुल्क घटकर शून्य हो गया है। उन्होंने उल्लेख किया कि ईएफटीए सदस्य देश प्रति वर्ष आधे ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक मूल्य की वस्तुओं और सेवाओं का आयात करते हैं, जो भारत के लिए एक महत्वपूर्ण बाजार है। उन्होंने निर्यात प्रोत्साहन परिषदों, उद्योग संघों और राज्य सरकारों से इस समझौते के लाभ देश के हर हिस्से के व्यवसायों तक पहुंचाने का आग्रह किया और अगले पांच वर्षों के लिए एक विस्तृत कार्य योजना तैयार करने को कहा।
इस समझौते की एक प्रमुख विशेषता इसकी निवेश प्रतिबद्धता है। समझौते के अनुच्छेद 7.1 के अनुसार, ईएफटीए सदस्य देशों का लक्ष्य इस समझौते के लागू होने के 10 वर्षों के भीतर भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) को 50 अरब अमेरिकी डॉलर तक बढ़ाना और उसके बाद के 5 वर्षों में अतिरिक्त 50 अरब अमेरिकी डॉलर का निवेश करना है। साथ ही, इस निवेश के माध्यम से भारत में 15 वर्षों के भीतर 10 लाख रोजगार सृजित करने का लक्ष्य रखा गया है।
