भारत को रेशम उत्पादन में विश्व स्तर पर नंबर 1 बनाने का लक्ष्य, 2030-31 तक 60,000 मीट्रिक टन उत्पादन का लक्ष्य: केंद्रीय मंत्री
केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह ने 2028-29 तक भारत को रेशम उत्पादन में दुनिया के शीर्ष स्थान पर पहुंचाने का संकल्प लिया है।

केंद्रीय वस्त्र मंत्री श्री गिरिराज सिंह और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम एवं श्रम और रोजगार राज्य मंत्री सुश्री शोभा करंदलाजे ने बेंगलुरु के यूएएस-जीकेवीके सभागार में केंद्रीय रेशम बोर्ड (CSB) के 77वें स्थापना दिवस और रेशम उत्पादों एवं प्रौद्योगिकियों की प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। इस अवसर पर सांसद और सीएसबी बोर्ड के सदस्य श्री जी. लक्ष्मीनारायण, वस्त्र मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुश्री पद्मिनी सिंगला और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। कार्यक्रम में कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और तमिलनाडु के रेशम उत्पादक और बुनकर भी शामिल हुए।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय वस्त्र मंत्री श्री गिरिराज सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार रेशम उत्पादन क्षेत्र के विस्तार और किसानों की आर्थिक प्रगति के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि देश का रेशम उत्पादन 2014 के 26,000 मीट्रिक टन से बढ़कर वर्तमान में 42,000 मीट्रिक टन हो गया है। सरकार ने 2030-31 तक इसे 60,000 मीट्रिक टन तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा है और 2028-29 तक भारत को रेशम उत्पादन में विश्व स्तर पर पहले स्थान पर लाने का संकल्प लिया है। मंत्री ने कहा कि शहतूत के पत्तों की पैदावार और रेशम के कीड़ों के पालन-पोषण चक्र को बढ़ाकर किसानों की वार्षिक आय को 10 लाख से 12 लाख रुपये तक ले जाने की आकांक्षा है।
श्री गिरिराज सिंह ने किसानों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर ‘सर्वश्रेष्ठ रेशम किसान’ पुरस्कार प्रतियोगिताओं के आयोजन का आह्वान किया। उन्होंने जोर दिया कि आधुनिक मशीनरी, संकर किस्में और वैज्ञानिकों के नए आविष्कार सीधे किसानों तक पहुंचने चाहिए। उन्होंने उल्लेख किया कि चीन में रेशम उत्पादन घटने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय रेशम की मांग बढ़ रही है। सरकार की प्राथमिकताओं में मूल्य श्रृंखला को मजबूत करना, वस्त्र बाजार को 300 बिलियन डॉलर तक ले जाना और बुनकरों व श्रमिकों के लिए न्यूनतम आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करना शामिल है।
केंद्रीय राज्य मंत्री सुश्री शोभा करंदलाजे ने बताया कि कर्नाटक देश के कुल रेशम उत्पादन में अग्रणी है। उन्होंने कहा कि सरकार बुनियादी ढांचे और औद्योगिक विकास पर ध्यान दे रही है ताकि वैश्विक निर्यात मानकों के अनुरूप उत्पादन बढ़े और आयात पर निर्भरता कम हो। उन्होंने बताया कि एमएसएमई ढांचे के तहत पंजीकरण करने वाले उद्यमियों को सरकार अनुदान और गुणवत्ता सुधार योजनाओं के माध्यम से सहयोग दे रही है।
वस्त्र मंत्रालय की संयुक्त सचिव (रेशम) सुश्री पद्मिनी सिंगला ने जानकारी दी कि 60,000 मीट्रिक टन के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए उच्च उपज वाले संकर रेशमकीटों और आधुनिक मशीनों का उपयोग किया जा रहा है। साथ ही, उत्पादन क्षमता और गुणवत्ता जांच के लिए एआई (AI), जीआईएस (GIS) और मशीन लर्निंग तकनीकों को एकीकृत किया जा रहा है।
इस कार्यक्रम के दौरान सिल्क बोर्ड द्वारा विभिन्न संगठनों के साथ समझौता ज्ञापनों (MoUs) का आदान-प्रदान किया गया, 28 वैज्ञानिकों को नियुक्ति पत्र दिए गए और उत्कृष्ट कर्मचारियों व हितधारकों को पुरस्कृत किया गया।

