भूमि अभिलेखों के आधुनिकीकरण पर भारत ने श्रीलंका के साथ साझा किए अपने अनुभव
ग्रामीण विकास मंत्रालय के भूमि संसाधन विभाग ने श्रीलंका के प्रशासनिक अधिकारियों के एक प्रतिनिधिमंडल के साथ डिजिटल इंडिया भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम और भू-स्थानिक प्रौद्योगिकियों पर चर्चा की।

ग्रामीण विकास मंत्रालय के भूमि संसाधन विभाग (DoLR) ने राष्ट्रीय सुशासन केंद्र (NCGG) द्वारा समन्वित एक कार्यक्रम के तहत श्रीलंका के प्रशासनिक अधिकारियों के एक प्रतिनिधिमंडल की मेजबानी की। भूमि संसाधन विभाग के संयुक्त सचिव श्री पी. नरहरि की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक का मुख्य उद्देश्य भूमि अभिलेखों के डिजिटलीकरण और आधुनिकीकरण में भारत के अनुभवों को साझा करना था।
इस वार्ता के दौरान डिजिटल इंडिया भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम (DILRMP), अधिकार अभिलेखों (RoR) के कम्प्यूटरीकरण, पंजीकरण का भूमि अभिलेखों के साथ एकीकरण और विशिष्ट भूमि पार्सल पहचान संख्या (ULPIN) पर विशेष जोर दिया गया। श्रीलंका प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व सुश्री पथिराज लक्ष्मण पथमाकुमारी ने किया, जिसमें श्रीलंका की भूमि, सर्वेक्षण और प्रशासनिक सेवाओं के वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे।
संयुक्त सचिव श्री पी. नरहरि ने कहा कि भूमि केवल एक प्रशासनिक रिकॉर्ड नहीं है, बल्कि यह आजीविका, आर्थिक गतिविधियों और नागरिकों की सुरक्षा से गहराई से जुड़ी है। उन्होंने बताया कि भारत ने प्रौद्योगिकी के माध्यम से भूमि प्रशासन का निरंतर आधुनिकीकरण किया है और वह श्रीलंकाई सहयोगियों के साथ इन अनुभवों को साझा करने के साथ-साथ उनकी कार्यप्रणालियों से सीखने के लिए भी उत्सुक है।
DoLR के निदेशक (एलआर) श्री अमित कुमार सिंह ने DILRMP के तकनीकी ढांचे का विवरण देते हुए बताया कि इसका उद्देश्य एक एकीकृत भूमि सूचना इकोसिस्टम बनाना है, जहाँ लिखित रिकॉर्ड, स्थानिक जानकारी और भू-स्थानिक प्रौद्योगिकियां एक-दूसरे के पूरक हों। उन्होंने DILRMP की कुछ प्रमुख उपलब्धियां साझा कीं, जिनमें 99.90 प्रतिशत अधिकार अभिलेखों का कम्प्यूटरीकरण, 97.43 प्रतिशत भूमि पंजीकरण मानचित्रों का डिजिटलीकरण और 40.58 करोड़ से अधिक भूमि पार्सल को 14 अंकों का अल्फ़ान्यूमेरिक भू-आधार (ULPIN) आवंटित करना शामिल है।
इसके अतिरिक्त, प्रतिनिधिमंडल को 'भारत लैंड स्टैक' का अवलोकन कराया गया, जो एक जीआईएस-आधारित संरचना है। यह प्रणाली उपग्रह और ड्रोन छवियों, संपत्ति पंजीकरण डेटा और ज़ोनिंग विनियमों जैसे विभिन्न डेटासेट को एक साथ लाकर किसी भूखंड का एकीकृत डिजिटल दृश्य प्रदान करती है।
बैठक में निदेशक (एलआर) श्री सर्वदानंद बरनवाल ने 'नक्शा' (शहरी बस्तियों का राष्ट्रीय भू-स्थानिक ज्ञान-आधारित भूमि सर्वेक्षण) कार्यक्रम के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम में सेंटीमीटर स्तर की सटीकता के लिए हवाई ड्रोनों, लिडार सेंसरों और 3डी रियलिटी मॉडल का उपयोग किया जा रहा है। उन्होंने साझा किया कि पायलट चरण के तहत 150 शहरी स्थानीय निकायों में से 145 में हवाई सर्वेक्षण पूरा हो चुका है, जिससे कानूनी रूप से प्रामाणिक शहरी संपत्ति (URPRO) कार्ड जारी करने की दिशा में प्रगति हो रही है।


