यूट्यूब इम्पैक्ट समिट 2026: डॉ. एल. मुरुगन ने विकसित भारत के लिए क्रिएटर इकोनॉमी और AI की भूमिका पर दिया जोर
सूचना और प्रसारण राज्य मंत्री डॉ. एल. मुरुगन ने कहा कि AI को रचनाकारों की जगह लेने के बजाय उन्हें सशक्त बनाने का माध्यम बनना चाहिए।

नई दिल्ली में आयोजित 'यूट्यूब इम्पैक्ट समिट 2026' में सूचना और प्रसारण एवं संसदीय मामलों के राज्य मंत्री डॉ. एल. मुरुगन ने मुख्य भाषण दिया। इस शिखर सम्मेलन का विषय “को-क्रिएटिंग: इंडियाज डिजिटल लीडरशिप एंड द ऑरेंज इकोनॉमी” था। इस दौरान मंत्री ने आर्थिक विकास, रोजगार और वैश्विक सांस्कृतिक पहुंच को बढ़ावा देने में भारत की डिजिटल और रचनात्मक अर्थव्यवस्था की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डाला।
शिखर सम्मेलन में जारी यूट्यूब इम्पैक्ट रिपोर्ट के अनुसार, यूट्यूब के रचनात्मक ईकोसिस्टम ने वर्ष 2025 में भारत की जीडीपी में 18,000 करोड़ रुपये से अधिक का योगदान दिया और देशभर में 9.6 लाख से अधिक पूर्णकालिक समकक्ष नौकरियों के सृजन में मदद की। डॉ. मुरुगन ने बताया कि 18,000 से अधिक भारतीय यूट्यूब चैनलों ने दस लाख सब्सक्राइबर का आंकड़ा पार कर लिया है और भारत में निर्मित सामग्री के कुल व्यूइंग टाइम का 15 प्रतिशत से अधिक हिस्सा अंतरराष्ट्रीय दर्शकों का है।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) पर चर्चा करते हुए डॉ. मुरुगन ने कहा कि भविष्य में 'AI बनाम रचनाकार' की स्थिति नहीं होनी चाहिए, बल्कि AI को रचनाकारों को सशक्त बनाने का साधन बनना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि AI लेखन, अनुवाद, संपादन, एनीमेशन, डिजाइन और वितरण में सहायता कर सकता है, लेकिन मानवीय कल्पना ही रचनात्मकता के केंद्र में रहेगी। उन्होंने उभरती प्रौद्योगिकियों के जिम्मेदार और नैतिक उपयोग पर बल दिया। समिट के दौरान इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिएटिव टेक्नोलॉजीज (IICT) के सहयोग से बनी "क्रिएट विद एआई" फिल्मों का भी अनावरण किया गया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के "भारत में सृजन करो, दुनिया के लिए सृजन करो" के दृष्टिकोण का उल्लेख करते हुए मंत्री ने 'ऑरेंज इकोनॉमी' के तीन मुख्य स्तंभों—विषयवस्तु, सृजनात्मकता और संस्कृति—पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि डिजिटल प्रौद्योगिकी ने अवसरों के भौगोलिक दायरे को बदल दिया है, जिससे हर जिले और भाषा की प्रतिभाएं वैश्विक स्तर पर पहुंच सकती हैं।
रचनात्मक प्रतिभाओं को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा चलाई जा रही WAVES, IICT, Create in India Challenges, Gems of India, WAVES Bazaar, MyWAVES और Creator's Corner जैसी पहलों की जानकारी देते हुए उन्होंने केंद्रीय बजट 2026-27 के प्रावधानों का जिक्र किया। इसके तहत 15,000 माध्यमिक विद्यालयों और 500 कॉलेजों में AVGC कंटेंट-क्रिएटर प्रयोगशालाएं स्थापित की जाएंगी। अनुमान है कि 2030 तक इस उद्योग में लगभग 20 लाख पेशेवरों की आवश्यकता होगी।
डॉ. मुरुगन ने युवा रचनाकारों को संवैधानिक मूल्यों के प्रति जागरूक रहने का संदेश दिया। उन्होंने अनुच्छेद 19 के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और अनुच्छेद 51ए के तहत मौलिक कर्तव्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि सृजन की स्वतंत्रता के साथ जिम्मेदारी भी जुड़ी होती है। उन्होंने विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए एक समावेशी और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी रचनात्मक ईकोसिस्टम के निर्माण का आह्वान किया।
इस अवसर पर यूट्यूब इंडिया की कंट्री मैनेजिंग डायरेक्टर सुश्री गुंजन सोनी, यूट्यूब की ग्लोबल गवर्नमेंट अफेयर्स एंड पब्लिक पॉलिसी की वाइस प्रेसिडेंट सुश्री लेस्ली मिलर और सूचना और प्रसारण मंत्रालय के संयुक्त सचिव श्री सेंथिल राजन भी उपस्थित थे।



