लिज्जत पापड़ महिला सशक्तिकरण और 'लोकल टू ग्लोबल' का प्रेरक उदाहरण: केवीआईसी चेयरमैन मनोज गोयल
केवीआईसी के चेयरमैन मनोज गोयल ने मुंबई में लिज्जत पापड़ की महिला कारीगरों को संबोधित करते हुए उनके आत्मनिर्भरता के प्रयासों की सराहना की।

खादी और ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) के चेयरमैन श्री मनोज गोयल ने बुधवार को मुंबई के सायन (पूर्व) स्थित श्री षणमुखानंद चंद्रशेखरेंद्र सरस्वती ऑडिटोरियम में आयोजित एक कार्यक्रम में 'श्री महिला गृह उद्योग लिज्जत पापड़' की महिला कारीगरों से संवाद किया। इस अवसर पर उन्होंने महिला कारीगरों के कार्यों की प्रशंसा की और प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के 'वोकल फॉर लोकल' एवं 'आत्मनिर्भर भारत' के दृष्टिकोण को साकार करने में लिज्जत पापड़ जैसे संगठनों की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया।
सभा को संबोधित करते हुए श्री मनोज गोयल ने बताया कि लिज्जत पापड़ की शुरुआत 15 मार्च 1959 को मात्र सात महिलाओं और 80 रुपये के साथ हुई थी। उन्होंने कहा कि यह पहल केवल पापड़ बनाने तक सीमित नहीं थी, बल्कि महिलाओं के आत्मनिर्भर बनने और सम्मान के साथ जीने के सपने का परिणाम थी। वर्ष 1966 में केवीआईसी द्वारा इसे 'ग्रामोद्योग' के रूप में मान्यता मिलने के बाद इस सफर को और गति मिली। वर्तमान में 16 राज्यों में फैली 83 शाखाओं के माध्यम से 45,000 से अधिक महिलाएं इस संगठन से जुड़ी हैं।
चेयरमैन ने जानकारी दी कि संगठन ने अपने उत्पादों का विस्तार करते हुए पापड़ के साथ-साथ मसाले, आटा, डिटर्जेंट और लिक्विड सोप का उत्पादन भी शुरू किया है। लिज्जत पापड़ के उत्पाद अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, जापान और दक्षिण अफ्रीका सहित 30 से अधिक देशों में निर्यात किए जा रहे हैं। श्री गोयल ने संगठन की गुणवत्ता, अनुशासन और कड़ी मेहनत की सराहना करते हुए इसे 'लोकल टू ग्लोबल' का एक उत्कृष्ट उदाहरण बताया।
लिज्जत पापड़ की राष्ट्रीय उपलब्धियों का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि संस्था को 2003 में 'बेस्ट विलेज इंडस्ट्री अवॉर्ड', 2005 में 'ब्रांड इक्विटी अवॉर्ड' और 2017 में 'महिला विकास पुरस्कार' से सम्मानित किया जा चुका है।
केवीआईसी की अन्य गतिविधियों पर चर्चा करते हुए चेयरमैन ने कहा कि देश भर में लगभग 5 लाख कारीगरों को रोजगार दिया जा रहा है, जिनमें 80 प्रतिशत महिलाएं हैं जो करीब 3,000 खादी संस्थानों में कार्यरत हैं। पिछले 12 वर्षों में खादी कारीगरों के मेहनताने में 275 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। उन्होंने बताया कि खादी और ग्रामोद्योग क्षेत्र का उत्पादन बढ़कर लगभग 1.25 लाख करोड़ रुपये और बिक्री 1.87 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई है।
इसके अतिरिक्त, उन्होंने जानकारी दी कि ग्राम उद्योग विकास योजना के तहत पिछले 12 वर्षों में 3.23 लाख से अधिक मशीनें और टूलकिट वितरित किए गए हैं। वहीं, प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) के माध्यम से अब तक लगभग 11 लाख नए प्रोजेक्ट शुरू किए गए हैं, जिनमें 30,000 करोड़ रुपये से अधिक की सब्सिडी दी गई है, जिससे करीब 1 करोड़ लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं।



