विकसित भारत- रोज़गार और आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) लागू, हर ग्रामीण परिवार को 125 दिनों के रोज़गार की कानूनी गारंटी
ग्रामीण विकास के लिए 'विकसित भारत- रोज़गार और आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण)' शुरू किया गया है, जिसके तहत पात्र ग्रामीण परिवारों को प्रति वर्ष 125 दिनों के वेतन वाले रोज़गार की गारंटी दी जाएगी।

भारत सरकार ने 'विकसित भारत @2047' के विज़न के अनुरूप ग्रामीण विकास के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण सुधार करते हुए 'विकसित भारत - रोज़गार और आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण)' (VB-G RAM G) की शुरुआत की है। वीबी-जी राम जी अधिनियम, 2025 पहली जुलाई 2026 से देश के सभी ग्रामीण इलाकों में लागू हो चुका है। इस मिशन में महात्मा गांधी नरेगा से परिवर्तन की प्रक्रिया को डिजिटल प्रणालियों के माध्यम से सुचारू रूप से संपन्न किया गया है।
यह कानून प्रत्येक वित्त वर्ष में 125 दिनों के वेतन वाले रोज़गार की कानूनी गारंटी प्रदान करता है। यह लाभ उन सभी ग्रामीण परिवारों को मिलेगा जिनके वयस्क सदस्य अकुशल शारीरिक कार्य के लिए स्वेच्छा से आगे आते हैं। यह मिशन मुख्य रूप से चार क्षेत्रों पर केंद्रित है: जल सुरक्षा, बुनियादी ग्रामीण अवसंरचना, आजीविका से जुड़ी अवसंरचना और खराब मौसम की घटनाओं से बचाव।
इस मिशन के केंद्र में 'विकसित ग्राम पंचायत योजनाएं' (VGPP) हैं, जो ग्राम सभा और ग्राम पंचायत की सक्रिय भागीदारी से तैयार की जाती हैं। यह ढांचा बॉटम-अप प्लानिंग (आद्योपांत नियोजन) को बढ़ावा देता है, जिससे गांव अपनी वास्तविक विकास ज़रूरतों और संपत्तियों की पहचान कर कार्यों को प्राथमिकता दे सकते हैं। योजना बनाने की प्रक्रिया में जीआईएस (GIS), युक्तधारा, पीएम गति शक्ति और अन्य डिजिटल माध्यमों का उपयोग किया जा रहा है। वीजीपीपी ढांचे के तहत चार मुख्य क्षेत्रों में 318 प्रकार के अनुमत कार्यों की पहचान की गई है।
1 जुलाई 2026 से 24 सितंबर 2026 के बीच की प्रगति के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 में 10.88 करोड़ सक्रिय कामगार रहे हैं। इस दौरान 2.83 लाख संपत्तियां बनाई गईं और 31.69 करोड़ से अधिक व्यक्ति-दिवस उपलब्ध कराए गए। मिशन में महिलाओं की भागीदारी 61.65 प्रतिशत रही है। लगभग 2.23 करोड़ ग्रामीण परिवारों के 2.81 करोड़ से अधिक लोगों को मांग पर रोज़गार उपलब्ध कराया गया। वर्तमान में देश की लगभग 2.31 लाख ग्राम पंचायतों में कार्य चल रहा है और 15.17 करोड़ ग्रामीण रोज़गार गारंटी कार्ड जारी किए जा चुके हैं। औसत मज़दूरी दर 283.24 रुपये प्रति व्यक्ति प्रति दिन रही है।
वित्तीय प्रगति की बात करें तो वित्त वर्ष 2026-27 के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अंतरिम आवंटन के रूप में कुल 93,841 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जिसमें से पहली किश्त के रूप में 25,880 करोड़ रुपये की मुख्य स्वीकृति (मदर सैंक्शन) जारी की गई है।
पारदर्शिता और शासन के लिए इस मिशन में आधुनिक तकनीक का उपयोग किया गया है। कामगारों के सत्यापन के लिए e-KYC, फेस ऑथेंटिकेशन और बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन का उपयोग हो रहा है। कार्यों की निगरानी के लिए जियो-टैगिंग, डिजिटल माप, इलेक्ट्रॉनिक मेज़रमेंट बुक्स (e-MB) और एआई-आधारित एनालिटिक्स का सहारा लिया जा रहा है। भुगतान के लिए प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) प्रणाली का उपयोग किया जा रहा है, जिसके तहत 2026-27 में 3.76 करोड़ लेनदेन किए गए हैं।

