स्वच्छता ही सेवा 2026: 'स्वच्छता में सहभाग' थीम के साथ जन-आंदोलन को मिलेगी नई दिशा
भारत सरकार ने 17 सितंबर से 2 अक्टूबर तक 'स्वच्छता में सहभाग' थीम के साथ 'स्वच्छता ही सेवा 2026' अभियान का शुभारंभ किया है, जिसका उद्देश्य स्वच्छता को एक सामूहिक जिम्मेदारी बनाना है।

भारत सरकार ने 17 सितंबर 2026 को 'स्वच्छता ही सेवा' (SHS) 2026 अभियान का शुभारंभ किया है। यह अभियान 2 अक्टूबर तक संचालित होगा, जिसका मुख्य विषय (थीम) “स्वच्छता में सहभाग; स्वच्छ भारत, विकसित भारत” रखा गया है। यह अभियान 'संपूर्ण सरकार' और 'संपूर्ण समाज' के दृष्टिकोण पर आधारित है, जिसमें युवाओं की भागीदारी, सामूहिक स्वामित्व और अपशिष्ट प्रबंधन की जिम्मेदारियों पर विशेष जोर दिया गया है।
SHS 2026 अभियान के तहत पांच मुख्य स्तंभों पर गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। पहले स्तंभ के तहत स्वच्छता लक्षित इकाइयों (CTUs) का कायाकल्प और सार्वजनिक स्थलों की सफाई की जाएगी, जिसमें बाज़ारों, स्कूलों, अस्पतालों और जलाशयों को कवर किया जाएगा। दूसरे स्तंभ 'स्वच्छ पाठशाला' के माध्यम से कक्षा 6 से 12 तक के छात्रों के लिए 'स्वच्छता ज्ञान यात्रा' आयोजित की जाएगी। तीसरे स्तंभ के तहत सफाईमित्र सुरक्षा सेवा एवं सम्मान शिविर लगाकर स्वच्छता कर्मियों को स्वास्थ्य सेवाएं और सुरक्षा उपकरण प्रदान किए जाएंगे। चौथे स्तंभ में जन भागीदारी के माध्यम से ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 के प्रति जागरूकता और सिंगल-यूज़ प्लास्टिक के खिलाफ अभियान चलाया जाएगा। पांचवें स्तंभ 'स्वच्छता से समृद्धि' के तहत रिड्यूस, रीयूज़ और रिसाइकिल (3R) पद्धतियों के साथ-साथ 'कबाड़ से जुगाड़' और 'कबाड़ से कला' को बढ़ावा दिया जाएगा।
इस अभियान के विशेष कार्यक्रमों में 1 अक्टूबर 2026 को 'एक दिन, एक घंटा, एक साथ' के तहत सामूहिक स्वच्छता गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। साथ ही, 2 अक्टूबर को विशेष ग्राम सभाओं और शहरी स्थानीय निकायों की बोर्ड बैठकों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (SWM) नियम 2026 पर चर्चा होगी।
यह अभियान 2014 में शुरू हुए स्वच्छ भारत मिशन (SBM) का एक विस्तार है। SBM के तहत ग्रामीण भारत को 2019 में खुले में शौच मुक्त (ODF) घोषित किया गया था। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 17 सितंबर 2026 तक 5.69 लाख से अधिक गांव ODF प्लस बन चुके हैं और 5.25 लाख से अधिक गांवों ने ODF प्लस मॉडल का दर्जा प्राप्त किया है। शहरी क्षेत्रों में 95,478 वार्डों में 100% डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण और 83,963 वार्डों में स्रोत पर 100% कचरा पृथक्करण की सुविधा उपलब्ध है।
स्वच्छता ही सेवा अभियान की यात्रा 2017 में शुरू हुई थी, जो समय के साथ विकसित हुई है। 2019 में इसका ध्यान प्लास्टिक कचरे पर था, 2021 में विजुअल क्लीनलीनेस पर, 2023 में 'कचरा-मुक्त भारत' पर और 2024 में 'स्वभाव स्वच्छता, संस्कार स्वच्छता' पर केंद्रित रहा। वर्ष 2025 में इसे 'स्वच्छोत्सव' के माध्यम से सामुदायिक उत्सवों से जोड़ा गया, और अब 2026 में यह सामूहिक सहभागिता और निरंतर व्यवहार परिवर्तन की दिशा में अग्रसर है।
