डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में दूसरे प्रो. (डॉ.) एन. आर. माधव मेनन मेमोरियल लेक्चर का आयोजन
राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित इस कार्यक्रम में न्याय व्यवस्था में मानवीय दृष्टिकोण और संवेदना के महत्व पर चर्चा की गई।

डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर (डीएआईसी) ने कॉमनवेल्थ लीगल एजुकेशन एसोसिएशन (सीएलईए) के सहयोग से राष्ट्रीय राजधानी में दूसरे प्रोफ़ेसर (डॉ.) एन. आर. माधव मेनन स्मारकीय व्याख्यान (मेमोरियल लेक्चर) का आयोजन किया। इस कार्यक्रम का उद्घाटन भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्य कांत ने किया।
'संवेदना के साथ न्याय करना: कानून के पेशे में मानवीय समझ' विषय पर आधारित इस व्याख्यान में भारत के उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश और राष्ट्रीय विधि सेवा प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने मुख्य संबोधन दिया। उन्होंने न्याय व्यवस्था में मानवीय और दयालु दृष्टिकोण के महत्व पर चर्चा करते हुए इस बात पर ज़ोर दिया कि दया का भाव कानून, निष्पक्षता और संवैधानिक मूल्यों के सिद्धांतों पर आधारित होना चाहिए।
इस अवसर पर भारत के अटॉर्नी जनरल डॉ. आर. वेंकटरमणी ने प्रो. (डॉ.) एन. आर. माधव मेनन के जीवन, विज़न और उनके योगदान पर विचार साझा किए। वहीं, भारतीय विधि संस्थान के वरिष्ठ प्रोफेसर, सीएलईए के अध्यक्ष और भारत के 21वें विधि आयोग के सदस्य प्रो. (डॉ.) एस. शिवकुमार ने भी सभा को संबोधित किया। कार्यक्रम की शुरुआत में डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर के निदेशक कर्नल आकाश पाटिल ने स्वागत भाषण दिया और सीएलईए की संयुक्त महासचिव डॉ. रुचि शर्मा डी. ने धन्यवाद प्रस्ताव पेश किया।
कार्यक्रम के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने प्रोफ़ेसर (डॉ.) एस. शिवकुमार द्वारा लिखित दो पुस्तकों— ‘इंडियन पर्सनल लॉ: यूनिटी एंड डाइवर्सिटी’ और ‘इकोनॉमिक्स एंड लॉ इन कॉन्टेक्स्ट’ (जिसमें सौगत तालुकदार सह-लेखक हैं) का विमोचन किया। इन पुस्तकों का परिचय गौरीशंकर नटेसन, सुश्री नबीला ज़हरा और डॉ. सौगत तालुकदार ने दिया।
यह मेमोरियल लेक्चर प्रोफ़ेसर (डॉ.) एन. आर. माधव मेनन की बौद्धिक विरासत को सम्मान देने के लिए आयोजित किया जाता है, जिन्होंने भारत में कानूनी शिक्षा के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इस आयोजन का उद्देश्य न्यायपालिका, कानून के विद्वानों, वकीलों और छात्रों के बीच कानूनी शिक्षा के बदलते पहलुओं पर संवाद को बढ़ावा देना है।


