पराली जलाने से रोकने के लिए CAQM की उच्च स्तरीय टीम ने अमृतसर और तरनतारन का दौरा किया
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने पंजाब के हॉटस्पॉट जिलों में पराली प्रबंधन की समीक्षा की और निगरानी के लिए 18 जिलों में फ्लाइंग स्क्वाड तैनात किए हैं।

एनसीआर और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) की एक उच्च स्तरीय टीम ने पंजाब के अमृतसर और तरनतारन जिलों का दौरा किया। इस टीम की अध्यक्षता सदस्य (तकनीकी) डॉ. एस.डी. अत्री ने की। इन दोनों जिलों को धान की पराली जलाने वाले 'हॉटस्पॉट' क्षेत्रों के रूप में पहचाना गया है। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य सर्दियों में एनसीआर और आसपास के इलाकों में वायु प्रदूषण के प्रमुख कारण, धान की पुआल जलाने की घटनाओं को कम करना और समाप्त करना है।
अमृतसर में आयोजित एक समीक्षा बैठक में अमृतसर और तरनतारन के उपायुक्तों तथा अन्य जिला स्तरीय अधिकारियों ने हिस्सा लिया। बैठक में धान के पराली के इन-सीटू (खेत में) और एक्स-सीटू (खेत के बाहर) प्रबंधन के लिए जिला प्रशासन की तैयारियों और आपसी तालमेल की समीक्षा की गई। आयोग ने किसानों को समय पर सीआरएम (Crop Residue Management) मशीनें उपलब्ध कराने, जागरूकता फैलाने और सूचना, शिक्षा एवं संचार (IEC) गतिविधियों को तेज करने पर जोर दिया।
9 और 10 अक्टूबर 2026 को टीम ने हॉटस्पॉट गांवों और सुविधाओं का जमीनी दौरा किया। अमृतसर जिले में फसल कटाई, खरीद और सीआरएम मशीनरी की उपलब्धता पर चर्चा हुई। यहाँ पराली प्रबंधन के लिए बेलर मशीनों का उपयोग किया जा रहा है और पुआल की गांठों के उपयोग के लिए बॉयलर उद्योगों के साथ एक आपूर्ति श्रृंखला बनाई गई है। प्रशासन ने एक कंट्रोल रूम, हेल्प डेस्क और हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया है ताकि किसानों को मशीनरी उपलब्ध कराई जा सके और पराली जलाने की घटनाओं पर त्वरित कार्रवाई हो सके।
तरनतारन जिले की समीक्षा के दौरान यह जानकारी मिली कि जिला प्रशासन ने सीआरएम मशीनरी की उपलब्धता के लक्ष्यों को काफी हद तक प्राप्त कर लिया है और यहाँ भी एक्स-सीटू प्रबंधन के लिए बेलर मशीनें कार्यरत हैं। नोडल और क्लस्टर अधिकारियों के माध्यम से फील्ड पेट्रोलिंग और निगरानी को मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं।
निगरानी व्यवस्था को पुख्ता करने के लिए आयोग ने 1 अक्टूबर 2026 से 30 नवंबर 2026 तक पंजाब के 18 जिलों में 'फ्लाइंग स्क्वाड' तैनात किए हैं। इन जिलों में संगरूर, तरनतारन, फिरोजपुर, मुक्तसर, बठिंडा, अमृतसर, मोगा, मानसा, फाजिल्का, पटियाला, लुधियाना, कपूरथला, फरीदकोट, बरनाला, मलेरकोटला, गुरदासपुर, जालंधर और फतेहगढ़ साहिब शामिल हैं।
सीएक्यूएम ने हॉटस्पॉट इलाकों में कम लागत वाले सेंसर और अन्य निगरानी तरीकों के उपयोग में सख्ती बरतने का निर्देश दिया है। साथ ही, किसानों, संग्राहकों और उद्योगों के बीच घनिष्ठ समन्वय स्थापित करने को कहा गया है ताकि वर्तमान कटाई सीजन में पराली जलाने की घटनाओं को प्रभावी ढंग से रोका जा सके।
