प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह-योजना: जलीय किसानों को मिलेगा बीमा प्रीमियम पर 40% तक का प्रोत्साहन
पीएम-एमकेएसएसवाई के तहत जलीय कृषि बीमा के लिए किसानों को प्रीमियम लागत पर 40% तक की वित्तीय सहायता दी जा रही है, ताकि प्राकृतिक आपदाओं और रोगों के जोखिम को कम किया जा सके।

भारत सरकार ने जलीय कृषि क्षेत्र में बढ़ते वित्तीय जोखिमों को प्रबंधित करने और किसानों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह-योजना (पीएम-एमकेएसएसवाई) के तहत जलीय कृषि बीमा पहल की शुरुआत की है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य रोगों, बाढ़ और जलवायु परिवर्तन जैसे जोखिमों से छोटे और सीमांत किसानों को बचाना है, ताकि वे आर्थिक संकट के समय भी अपना उत्पादन जारी रख सकें।
8 फरवरी 2024 को मंजूर की गई इस सह-योजना के घटक 1-बी के अंतर्गत, पात्र लाभार्थियों को जलीय कृषि बीमा पॉलिसी खरीदने पर प्रीमियम लागत का 40 प्रतिशत तक प्रोत्साहन प्रदान किया जा रहा है। यह लाभ राष्ट्रीय मत्स्य डिजिटल प्लेटफॉर्म (एनएफडीपी) के माध्यम से प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) द्वारा सीधे किसानों के खातों में भेजा जाता है।
योजना के तहत प्रोत्साहन की सीमाएं निर्धारित की गई हैं। तालाब जलीय कृषि के लिए यह सहायता जल प्रसार क्षेत्र के प्रति हेक्टेयर अधिकतम 25,000 रुपये तक है, जिसमें अधिकतम 4 हेक्टेयर क्षेत्र के लिए कुल 1,00,000 रुपये तक का लाभ मिल सकता है। केज कल्चर, बायोफ्लॉक, आरएएस और रेसवे जैसी उन्नत प्रणालियों के लिए भी 40 प्रतिशत प्रोत्साहन का प्रावधान है, जिसकी अधिकतम सीमा 1,00,000 रुपये और इकाई का अधिकतम आकार 1,800 घन मीटर तय किया गया है। इसके अतिरिक्त, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और महिला लाभार्थियों को सामान्य श्रेणी की तुलना में 10 प्रतिशत अतिरिक्त प्रोत्साहन दिया जाएगा।
दावा निपटान की प्रक्रिया को समयबद्ध बनाया गया है। झींगा पालन के लिए दावों का निपटान 30 दिनों के भीतर और अन्य जलीय कृषि गतिविधियों के लिए 45 दिनों के भीतर पूरा किया जाना अनिवार्य है। वर्तमान में ओरिएंटल इंश्योरेंस, एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी ऑफ इंडिया, न्यू इंडिया एश्योरेंस और यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनियां इस कवरेज को उपलब्ध करा रही हैं। सरकार निजी बीमा कंपनियों को भी इस इकोसिस्टम से जोड़ने पर काम कर रही है।
भारत के मत्स्य उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वर्ष 2013-14 में कुल मछली उत्पादन 9.6 मिलियन टन था, जो वर्ष 2024-25 में बढ़कर 19.8 मिलियन टन हो गया है। भारत अब लगभग 8 प्रतिशत वैश्विक हिस्सेदारी के साथ दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक देश बन गया है। समुद्री उत्पादों के निर्यात में भी वृद्धि हुई है, जो 2013-14 के 5.08 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 2025-26 में 8.46 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया है।
योजना के कार्यान्वयन की प्रगति पर जानकारी देते हुए बताया गया कि अब तक कुल 316 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 127 आवेदनों को मंजूरी देकर 321.74 हेक्टेयर क्षेत्र के किसानों को 40.03 लाख रुपये की राशि वितरित की जा चुकी है।


