भारतीय तटरक्षक बल ने ओडिशा के पारादीप में आयोजित किया 12वां राष्ट्रीय समुद्री खोज एवं बचाव अभ्यास 'सारेक्स-2026'
पारादीप तट पर आयोजित इस अभ्यास का उद्देश्य समुद्री सुरक्षा और बचाव तैयारियों को मजबूत करना था, जिसमें भारत सहित 30 देशों के पर्यवेक्षकों ने हिस्सा लिया।

भारतीय तटरक्षक बल ने 8 अक्टूबर 2026 को ओडिशा के पारादीप के पास 12वें राष्ट्रीय समुद्री खोज एवं बचाव अभ्यास (सारेक्स-2026) का आयोजन किया। यह अभ्यास राष्ट्रीय समुद्री खोज एवं बचाव बोर्ड (एनएमएसएआरबी) की देखरेख में संपन्न हुआ। इस वर्ष का अभ्यास “खोज एवं बचाव तैयारियों तथा समुद्री सुरक्षा को विस्तृत करने के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग” विषय पर आधारित था।
इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य समुद्र में बड़े पैमाने पर बचाव अभियानों के लिए परिचालन तैयारियों, आपसी समन्वय और संयुक्त कार्रवाई क्षमता का प्रदर्शन करना था। भारतीय तटरक्षक बल के महानिदेशक परमेश शिवमणि ने इस अभ्यास का अवलोकन किया। इसमें तटरक्षक बल, भारतीय नौसेना, वायु सेना, भारतीय जहाजरानी निगम, जहाजरानी महानिदेशालय, मत्स्य पालन विभाग, सीमा शुल्क विभाग, समुद्री पुलिस, पारादीप पत्तन प्राधिकरण और ओडिशा राज्य प्रशासन सहित विभिन्न समुद्री और हवाई एजेंसियों ने भाग लिया।
अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इस अभ्यास में 30 देशों के 32 पर्यवेक्षकों ने भी हिस्सा लिया। उनकी भागीदारी से विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय, सर्वोत्तम कार्य प्रणालियों के आदान-प्रदान और संयुक्त कार्य क्षमता को बल मिला, जिससे समुद्री खोज एवं बचाव के क्षेत्र में एक विश्वसनीय साझेदार के रूप में भारत की भूमिका मजबूत हुई।
अभ्यास में भारतीय तटरक्षक बल के 15 जहाज, तीन डोर्नियर विमान, तीन उन्नत हल्के हेलिकॉप्टर और एक चेतक हेलिकॉप्टर शामिल थे। साथ ही, भारतीय वायु सेना के सी-130जे और एमआई-17 विमान, भारतीय नौसेना के दो जहाज, असैन्य संसाधन और राज्य सरकार की सहायता इकाइयां भी तैनात रहीं।
अभ्यास के दौरान एक संयुक्त संकट की स्थिति निर्मित की गई, जिसमें 228 यात्रियों वाले एक यात्री विमान के पारादीप बंदरगाह के पास समुद्र में गिरने और एमवी जुम्बा नामक कंटेनर जहाज से टकराने का परिदृश्य रखा गया। इस टक्कर से पोत को नुकसान पहुंचा और उसमें आग लग गई। इस स्थिति से निपटने के लिए घटना नियंत्रण केंद्र को सक्रिय करने, आग बुझाने, हेलिकॉप्टर से लोगों को निकालने, जीवन-रक्षक नौकाओं और उपकरणों की तैनाती, जेसन क्रैडल, जेमिनी रिकवरी, बचाव टोकरी और बचाव जाल जैसी प्रक्रियाओं का अभ्यास किया गया। इसके अतिरिक्त, दूर से संचालित वाहन (आरओवी) की क्षमताओं का भी प्रदर्शन किया गया।
सारेक्स-2026 ने 'सागर' के दृष्टिकोण और महासागर की भावना के अनुरूप एक तेज, प्रौद्योगिकी-सक्षम और बेहतर समन्वय वाली खोज एवं बचाव प्रणाली विकसित करने के भारत और उसके अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों के संकल्प को दोहराया।
