भारतीय वैज्ञानिकों ने विकसित किया धातु-रहित उत्प्रेरक, स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन होगा और किफायती
शोधकर्ताओं ने TTT-DHTD नामक एक नया धातु-रहित कार्बनिक छिद्रयुक्त पदार्थ विकसित किया है, जो जिंक-एयर बैटरियों में महंगे प्लैटिनम का विकल्प बन सकता है।

भारतीय वैज्ञानिकों ने एक नया धातु-रहित उत्प्रेरक विकसित किया है, जो अगली पीढ़ी की स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकियों की लागत को काफी हद तक कम कर सकता है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के अंतर्गत कोलकाता स्थित एसएन बोस राष्ट्रीय बुनियादी विज्ञान केंद्र (SNBNCBS), मोहाली स्थित नैनो विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (INST) और अमरावती स्थित एसआरएम विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं की टीम ने इस पदार्थ को तैयार किया है।
इस विशेष रूप से डिज़ाइन किए गए धातु-रहित कार्बनिक छिद्रयुक्त पदार्थ को 'TTT-DHTD' नाम दिया गया है। इसे 2,4,6-ट्रिस(4-एमिनोफेनिल)-1,3,5-ट्रायज़ीन (TTT) और 4,8-डाइऑक्सो-4,8-डाइहाइड्रोबेंज़ो[1,2-b:4,5-b']डाइथियोफीन-2,6-डाइकार्बाल्डिहाइड (DHTD) लिंकर्स से बनाया गया है। कार्बन, सल्फर, नाइट्रोजन और हाइड्रोजन जैसे प्रचुर मात्रा में उपलब्ध तत्वों से निर्मित यह पदार्थ मधुमक्खी के छत्ते जैसी छिद्रपूर्ण संरचना बनाता है, जो ऑक्सीजन को कुशलतापूर्वक बिजली में परिवर्तित करता है।
जिंक-एयर बैटरियों में ऑक्सीजन अपचयन अभिक्रिया (ORR) बैटरी की दक्षता के लिए महत्वपूर्ण होती है। वर्तमान में, हाइड्रोजन ईंधन सेल जैसी प्रौद्योगिकियां कुशल ORR उत्प्रेरक के रूप में प्लैटिनम पर निर्भर हैं, जो अत्यंत दुर्लभ और महंगा है। शोध के अनुसार, TTT-DHTD बिना किसी कीमती धातु के उपयोग के प्लैटिनम के समान प्रदर्शन करने में सक्षम है। प्रयोगशाला परीक्षणों में इस नए उत्प्रेरक ने व्यावसायिक प्लैटिनम उत्प्रेरकों के प्रदर्शन का लगभग 96 प्रतिशत हासिल किया और 120 घंटे के निरंतर संचालन के बाद भी अपनी स्थिरता बनाए रखी।
SNBNCBS के डॉ. प्रदीप पचफुले, INST के प्रोफेसर रामेंद्र सुंदर डे और एसआरएम विश्वविद्यालय के प्रोफेसर रंजीत थापा की देखरेख में किए गए कंप्यूटर सिमुलेशन से पता चला कि इस पदार्थ की आणविक संरचना ऑक्सीजन अणुओं को आसानी से जुड़ने और प्रतिक्रिया करने के लिए आदर्श स्थान प्रदान करती है, जिससे विद्युत उत्पादन तेज और कुशल हो जाता है।
यह शोध 'साइंस एडवांसेज' पत्रिका में प्रकाशित हुआ है। प्लैटिनम के स्थान पर सस्ते कार्बनिक पदार्थों का उपयोग जिंक-एयर सेल की लागत को कम कर सकता है, जिससे स्वच्छ परिवहन, पोर्टेबल पावर सिस्टम और नवीकरणीय ऊर्जा भंडारण अधिक किफायती और सुलभ हो सकेंगे।


