मिलिट्री नर्सिंग सर्विस के शताब्दी वर्ष समारोह में डिजिटल नवाचारों और करुणामय देखभाल पर चर्चा
दिल्ली के मानेकशॉ सेंटर में आयोजित एमएनएस शताब्दी वैज्ञानिक सम्मेलन में स्वास्थ्य सेवा में एआई और बहुभाषी प्रौद्योगिकियों की भूमिका पर जोर दिया गया।

मिलिट्री नर्सिंग सर्विस (एमएनएस) ने दिल्ली कैंट स्थित मानेकशॉ सेंटर में अपने शताब्दी वर्ष 2026 के समापन समारोह के हिस्से के रूप में एक वैज्ञानिक सम्मेलन का आयोजन किया। इस सम्मेलन का विषय “नर्सिंग अभ्यास में डिजिटल नवाचार: प्रौद्योगिकी और करुणामय देखभाल में सामंजस्य” था। इस कार्यक्रम में वरिष्ठ नेतृत्व, नर्सिंग पेशेवरों, स्वास्थ्य देखभाल चिकित्सकों और प्रौद्योगिकी क्षेत्र के विशेषज्ञों ने भाग लेकर स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने में डिजिटल नवाचारों की भूमिका पर विचार-विमर्श किया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थल सेनाध्यक्ष जनरल धीरज सेठ थे। उद्घाटन समारोह में भाषिणी के सीईओ श्री अमिताभ नाग ने मुख्य वक्ता के रूप में “स्वास्थ्य में प्रौद्योगिकी: स्वास्थ्य देखभाल परिदृश्य में बदलाव लाने में डिजिटल स्वास्थ्य के अवसरों का दायरा” विषय पर अपना संबोधन दिया। इस अवसर पर एमएनएस डायरी और नर्सिंग रिसर्च कंपेंडियम का विमोचन किया गया, साथ ही “डिजिटल पल्स ऑफ नर्सिंग: कनेक्टिंग टेक्नोलॉजी, ट्रांसफॉर्मिंग केयर” शीर्षक वाली वैज्ञानिक स्मारिका का ई-विमोचन भी किया गया।
अपने संबोधन में श्री अमिताभ नाग ने स्वास्थ्य देखभाल में डिजिटल प्रौद्योगिकियों की परिवर्तनकारी क्षमता पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि मरीजों और स्वास्थ्य पेशेवरों की जरूरतों के अनुरूप सटीक तकनीक विकसित करने के लिए भाषा, संदर्भ और विशिष्ट स्वास्थ्य डेटा का होना आवश्यक है। उन्होंने भाषिणी के चार स्तंभों, जिनमें वाक् और अनुवाद प्रौद्योगिकियां शामिल हैं, के बारे में बताया। उन्होंने जोर दिया कि ये प्रौद्योगिकियां भारत के विविध भाषाई परिवेश में स्वास्थ्य प्रणालियों को अधिक समावेशी बना सकती हैं और संचार की बाधाओं को कम कर सकती हैं।
श्री नाग ने स्वास्थ्य देखभाल पर केंद्रित एआई प्रणालियों के लिए चिकित्सा और नर्सिंग शब्दावलियों को आधारभूत संसाधन के रूप में विकसित करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने स्पष्ट किया कि जहां चिकित्सा शब्दावली में एकरूपता होती है, वहीं मरीज अक्सर अपने लक्षणों को रोजमर्रा की भाषा में व्यक्त करते हैं। इसलिए, एआई प्रणालियों को इस विविधता को समझने के लिए विशिष्ट भाषा डेटा की जरूरत होती है ताकि नैदानिक शब्दावली और आम भाषा के बीच एक साझा स्तर तैयार किया जा सके।
उन्होंने 'भाषिणी डोमेन इनोवेशन चैलेंज' का भी उल्लेख किया, जो स्वास्थ्य संचार की चुनौतियों के लिए तकनीकी समाधानों को प्रोत्साहित करता है। उदाहरण के तौर पर ओपीडी नुस्खों के लिए एआई-संचालित वॉयस-टू-टेक्स्ट टूल का जिक्र किया गया, जो नैदानिक कार्यप्रवाह और दस्तावेजीकरण को प्रभावी बना सकता है। करुणामय स्वास्थ्य देखभाल पर बोलते हुए श्री नाग ने कहा, “संदर्भ महत्वपूर्ण है, देखभाल महत्वपूर्ण है, करुणा महत्वपूर्ण है और स्वास्थ्य देखभाल में, ये तीनों और भी महत्वपूर्ण हो जाते हैं, जब हम लोगों के साथ ऐसी भाषा में संवाद कर रहे होते हैं जिसे वे समझते हैं।”
गौरतलब है कि डिजिटल इंडिया भाषिणी प्रभाग (डीआईबीडी), इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) के तहत डिजिटल इंडिया कॉरपोरेशन (डीआईसी) के अंतर्गत कार्य करता है। यह एआई-संचालित बहुभाषी डिजिटल समावेशन के लिए भारत का राष्ट्रीय मंच है। भाषिणी वर्तमान में 800 से अधिक सरकारी वेबसाइटों को समर्थन देता है और 36 भारतीय टेक्स्ट भाषाओं, 23 भारतीय वॉयस भाषाओं तथा 35 अंतरराष्ट्रीय भाषाओं का समर्थन करता है।


