राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) मनाएगा अपना 23वां स्थापना दिवस, ABS के जरिए 278 करोड़ रुपये से अधिक जारी
राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण 1 अक्टूबर 2026 को अपना 23वां स्थापना दिवस मनाएगा, जिसने जैव विविधता संरक्षण और सामुदायिक लाभ के लिए महत्वपूर्ण वित्तीय प्रगति की है।

राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) 1 अक्टूबर 2026 को अपना 23वां स्थापना दिवस मनाएगा। इस अवसर पर प्राधिकरण जैव विविधता संरक्षण और स्थानीय समुदायों के लिए 'पहुंच और लाभ साझाकरण' (Access and Benefit Sharing - ABS) के ठोस परिणामों और प्रगति को रेखांकित करेगा।
एनबीए ने वर्ष 2008 से ABS के माध्यम से 278 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जारी की है। इसमें से 200 करोड़ रुपये से अधिक की राशि देश भर के समुदायों, किसानों, संस्थानों और जैव-विविधता के संरक्षण के लिए वितरित की गई है। इस राशि का लाभ 10,500 से अधिक जैव विविधता प्रबंधन समितियों (BMC), 28 राज्य जैव विविधता बोर्डों (SBB), 7 केंद्र शासित प्रदेश जैव विविधता परिषदों (UTBC), 6 वन विभागों और 58 अनुसंधान संस्थानों एवं विश्वविद्यालयों को मिला है।
आंकड़ों के अनुसार, 1 सितंबर 2025 से 31 अगस्त 2026 के बीच एनबीए को ABS के रूप में 12.93 करोड़ रुपये प्राप्त हुए, जबकि उसने राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों, संस्थानों, किसानों और स्थानीय समुदायों को 132.01 करोड़ रुपये जारी किए।
ABS तंत्र के तहत विभिन्न क्षेत्रों जैसे बीज, आयुष, फार्मास्यूटिकल्स, न्यूट्रास्यूटिकल्स, जैव प्रौद्योगिकी, सौंदर्य प्रसाधन और खाद्य एवं पेय पदार्थों से योगदान प्राप्त हुए हैं। इसमें नुनहेम्स इंडिया, ईस्ट वेस्ट सीड्स इंडिया, बायर बायोसाइंस, हिमालय वेलनेस कंपनी, डाबर इंडिया और लोरियल इंडिया जैसी कंपनियों ने योगदान दिया है।
हालिया वितरण में कपास की 25,431 किस्मों के लिए 6.67 करोड़ रुपये, सरसों संरक्षण के लिए 15.52 करोड़ रुपये और भिंडी की 139 किस्मों व 28 हाइब्रिड किस्मों के लिए 3.51 करोड़ रुपये शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, आंध्र प्रदेश वन विभाग और आंध्र प्रदेश राज्य जैव विविधता बोर्ड के माध्यम से लाल चंदन के संरक्षण के लिए लगभग 100 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं।
प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए एनबीए ने ABS ई-फाइलिंग प्रणाली लागू की है। अब तक प्राधिकरण को 11,273 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 6,074 समझौतों पर हस्ताक्षर/मंजूरी दी गई और 2,098 प्रमाण-पत्र जारी किए गए हैं।
यह संरचना जैव विविधता अधिनियम 2002 (संशोधित 2023), जैव विविधता नियम 2024 और जैव विविधता (पहुंच एवं लाभ साझाकरण) विनियम 2025 द्वारा समर्थित है। यह पहल 'विकसित भारत 2047' के दृष्टिकोण और पीएम-जनमन, प्रधानमंत्री जनजातीय विकास मिशन एवं वन धन जैसी योजनाओं के पूरक के रूप में कार्य कर रही है। भारत का यह मॉडल नागोया प्रोटोकॉल के सिद्धांतों और एनबीएसएपी 2024-2030 की प्रतिबद्धताओं को आगे बढ़ाता है।

