विधि और न्याय मंत्रालय ने 'कबाड़ से जुगाड़' विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया
स्वच्छता ही सेवा अभियान के तहत विधि और न्याय मंत्रालय के विधायी विभाग ने बेकार वस्तुओं से उपयोगी चीजें बनाने के लिए एक विशेष कार्यशाला आयोजित की।

विधि और न्याय मंत्रालय के विधायी विभाग ने 'स्वच्छता ही सेवा' अभियान के अंतर्गत 29 सितंबर, 2026 को कर्तव्य भवन-2 के कॉन्फ्रेंस हॉल में एक कार्यशाला का आयोजन किया। इस कार्यशाला का विषय "बेस्ट आउट ऑफ वेस्ट – टर्निंग वेस्ट इंटू वंडर: कबाड़ से जुगाड़" था।
यह कार्यक्रम इंडिया एड्स (एनजीओ) और एन. के. बागड़ोदिया पब्लिक स्कूल, द्वारका, सेक्टर-4 के विशेषज्ञों के सहयोग से संपन्न हुआ। कार्यशाला में इंडिया एड्स एनजीओ की जनरल सेक्रेटरी श्रीमती अर्चना श्रीवास्तव, एन. के. बागड़ोदिया पब्लिक स्कूल की प्राचार्या सुश्री अंजलि खरबंदा, टीजीटी-साइंस और स्कूल सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी कोऑर्डिनेटर सुश्री बैसाखी भट्टाचार्जी, पीजीटी-भूगोल और हेल्थ एंड वेलनेस कोऑर्डिनेटर सुश्री श्वेता तुलस्यान सहित वॉलंटियर्स सुश्री विदुषी सिन्हा और आर्यन गुप्ता ने अपनी विशेषज्ञता साझा की।
इस कार्यक्रम की अध्यक्षता विधायी विभाग के संयुक्त सचिव और विधायी परामर्शदाता (JS&LC) श्री जी. पानमेई ने की। कार्यशाला में विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ-साथ राजभाषा विंग और विधि साहित्य प्रकाशन से जुड़े कर्मियों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया।
कार्यशाला के दौरान विशेषज्ञों ने व्यावहारिक प्रदर्शन (प्रैक्टिकल डेमो) के माध्यम से दिखाया कि कैसे रचनात्मकता और नवाचार के जरिए बेकार फेंकी गई चीजों को उपयोगी और आकर्षक उत्पादों में बदला जा सकता है। विशेषज्ञों ने कचरा प्रबंधन, रीसाइक्लिंग और टिकाऊ जीवनशैली को बढ़ावा देने के लिए कई आसान और प्रभावी तरीके साझा किए।
श्री जी. पानमेई ने प्रतिभागियों के उत्साह की सराहना करते हुए कहा कि रोजमर्रा के जीवन में टिकाऊ तरीकों को अपनाना और जिम्मेदार कचरा प्रबंधन की दिशा में किए गए छोटे-छोटे निरंतर प्रयास एक साफ-सुथरे और हरे-भरे पर्यावरण के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। उन्होंने सभी को कचरे के बेहतर उपयोग के लिए रचनात्मक तरीके खोजने के लिए प्रोत्साहित किया।


