विशाखापत्तनम: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारतीय नौसेना की बढ़ती समुद्री शक्ति और स्वदेशी क्षमता को सराहा
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने विशाखापत्तनम में 'बाराखाना' कार्यक्रम के दौरान भारतीय नौसेना की युद्धक क्षमता और समुद्री सीमाओं की सुरक्षा में उसकी निर्णायक भूमिका पर जोर दिया।
रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने 05 अक्टूबर, 2026 को विशाखापत्तनम में पूर्वी नौसेना कमान द्वारा आयोजित ‘बाराखाना’ कार्यक्रम में भाग लिया। इस अवसर पर उन्होंने भारतीय नौसेना के कर्मियों और उनके परिवारों के साथ बातचीत की और देश के समुद्री हितों की सुरक्षा के प्रति नौसेना की अटूट प्रतिबद्धता की सराहना की।
उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि भारतीय नौसेना एक शक्तिशाली समुद्री शक्ति के रूप में उभरी है, जिसकी क्षमताओं को हिंद-प्रशांत क्षेत्र में मान्यता प्राप्त है। उन्होंने सभी मौसमों और परिचालन स्थितियों में भारत की समुद्री सीमाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नौसेना कर्मियों के समर्पण की प्रशंसा की। नौसेना के शौर्य का स्मरण करते हुए उन्होंने 1971 के युद्ध के दौरान 'ऑपरेशन ट्राइडेंट' का विशेष उल्लेख किया, जिसमें भारतीय नौसेना ने कराची बंदरगाह पर हमला कर अपनी आक्रामक क्षमता का प्रदर्शन किया था।
भारत की बढ़ती समुद्री ताकत पर चर्चा करते हुए श्री राजनाथ सिंह ने बताया कि नौसेना 21वीं सदी के सुरक्षा परिदृश्य के अनुरूप खुद को ढाल रही है। उन्होंने कहा कि देश वर्तमान में स्वदेशी विमानवाहक पोतों, परमाणु पनडुब्बियों, स्टील्थ फ्रिगेट्स और स्कॉर्पीन श्रेणी की पनडुब्बियों जैसे उन्नत प्लेटफॉर्म विकसित कर उनका समावेश कर रहा है। उन्होंने जोर दिया कि नौसेना की वास्तविक शक्ति केवल तकनीक और पोतों में नहीं, बल्कि कर्मियों की व्यावसायिक दक्षता, देशभक्ति और साहस में निहित है।
रक्षा मंत्री ने एक व्यापक समुद्री विजन साझा करते हुए कहा कि भारत को ‘समुद्रों से समृद्धि और शक्ति की ओर आगे बढ़ने’ की भावना के साथ कार्य करना चाहिए। उनके अनुसार, महासागरों को केवल सुरक्षा वाली सीमाओं के रूप में नहीं, बल्कि आर्थिक विकास, सामरिक प्रभाव और राष्ट्रीय समृद्धि के अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए।
कार्यक्रम के दौरान श्री राजनाथ सिंह ने नौसेना कर्मियों के परिवारों के योगदान को एक मूल्यवान राष्ट्रीय संपदा बताया। उन्होंने कहा कि जब कर्मी समुद्र में तैनात होते हैं, तब उनके परिवार घर की जिम्मेदारियां संभालकर उन्हें आवश्यक संबल प्रदान करते हैं। उन्होंने ‘बाराखाना’ की पारिवारिक भावना की सराहना करते हुए इसे रक्षा बलों और राष्ट्र के बीच गहरे संबंध व भाईचारे का प्रतीक बताया।

