स्वच्छता उद्यमी योजना: कचरा बीनने वाली मणिकला दुर्गा ने वित्तीय सहायता से हासिल की आर्थिक आत्मनिर्भरता
राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी वित्त एवं विकास निगम की योजना के माध्यम से मणिकला दुर्गा ने अपनी मासिक आय दोगुनी कर ली है और अब वे एक टिकाऊ आजीविका की ओर अग्रसर हैं।

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की पहल से वंचित समुदायों के लोगों को टिकाऊ आजीविका शुरू करने और उनकी आर्थिक स्थिति सुधारने के अवसर मिल रहे हैं। इसी दिशा में अनुसूचित जनजाति (एसटी) समुदाय से आने वाली 39 वर्षीय सुश्री मणिकला दुर्गा की सफलता एक महत्वपूर्ण उदाहरण है।
मणिकला दुर्गा पिछले 15 वर्षों से गुंटूर नगर निगम में कचरा बीनने का काम कर रही थीं। आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि और शिक्षा के अभाव के कारण उनकी मासिक आय लगभग 8,000 रुपये थी, जिससे परिवार का खर्च चलाना और बच्चों को बेहतर अवसर प्रदान करना उनके लिए कठिन था।
उनकी स्थिति में बदलाव तब आया जब उन्हें और उनके तीन अन्य साथियों को ‘नवजीवन संगठन’ के माध्यम से राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी वित्त एवं विकास निगम की ‘स्वच्छता उद्यमी योजना (एसयूवाई)’ के तहत वित्तीय सहायता मिली। यह सहायता 19 जून 2023 को खुली नालियों की सफाई के लिए डी-सिल्टिंग मशीन (बैकहो बकेट वाला एक्सकेवेटर) खरीदने हेतु अग्रिम पूंजीगत सब्सिडी के रूप में प्रदान की गई थी।
इस सामूहिक परियोजना की कुल लागत 35,03,500 रुपये थी, जिसमें 21,27,624 रुपये का ऋण और 13,75,876 रुपये की पूंजीगत सब्सिडी शामिल थी। इस सहायता के सदुपयोग से सुश्री दुर्गा की मासिक आय में 8,000 रुपये की अतिरिक्त वृद्धि हुई है, जिससे अब उनकी कुल मासिक आय लगभग 16,000 रुपये हो गई है।
अपनी सफलता पर संतोष व्यक्त करते हुए सुश्री दुर्गा ने कहा कि इस वित्तीय सहायता से उन्हें अपनी आमदनी बढ़ाने और परिवार की आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने में मदद मिली है। इससे उन्हें अधिक आत्मविश्वास और आर्थिक स्थिरता मिली है, जिससे वे अपने बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए योगदान कर पा रही हैं।



