स्वच्छ भारत मिशन: ग्रामीण स्वच्छता अब बुनियादी ढांचे से आगे बढ़कर बना जन-आंदोलन
स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण के माध्यम से भारत ने 100 प्रतिशत स्वच्छता कवरेज हासिल किया है और अब ध्यान ओडीएफ प्लस गांवों के जरिए ठोस व तरल कचरा प्रबंधन पर केंद्रित है।

ग्रामीण भारत में स्वच्छता का परिदृश्य पिछले एक दशक में पूरी तरह बदल गया है। वर्ष 2014 में स्वच्छ भारत मिशन (एसबीएम) की शुरुआत के समय स्वच्छता कवरेज केवल 39 प्रतिशत था, जो 2019 तक बढ़कर 100 प्रतिशत हो गया। इस अवधि के दौरान 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 10.28 करोड़ से अधिक शौचालय बनाए गए, जिसके बाद ग्रामीण भारत को 'खुले में शौच से मुक्त' (ओडीएफ) घोषित किया गया।
अब मिशन का जोर स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण के दूसरे चरण पर है, जिसका मुख्य उद्देश्य ओडीएफ के दर्जे को बनाए रखना और ठोस एवं तरल कचरा प्रबंधन प्रणालियों को मजबूत करना है। 17 सितंबर 2026 तक भारत में 5.69 लाख ओडीएफ प्लस गांव बन चुके हैं, जिनमें से 5.25 लाख ने 'ओडीएफ प्लस मॉडल' का दर्जा हासिल किया है। साथ ही, 5.38 लाख गांवों में ठोस और 5.65 लाख गांवों में तरल कचरा प्रबंधन की व्यवस्था की गई है। वर्तमान में 582 जिलों में 1,314 गोबरधन (GOBARdhan) बायोगैस प्लांट संचालित हैं, जबकि व्यक्तिगत स्तर पर 12.22 करोड़ शौचालय और 98,273 बायोगैस प्लांट बनाए गए हैं।
इस अभियान में महिलाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। एसबीएम-जी के तहत महिलाओं को 'स्वच्छाग्रही' के रूप में प्राथमिकता दी गई है और डीएवाई-एनआरएलएम स्व-सहायता समूहों (एसएचजी) को व्यवहार परिवर्तन संचार (BCC) के लिए मंच के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। उदाहरण के लिए, पश्चिम बंगाल के हावड़ा में एसएचजी समूहों ने 18 दिनों में 9.32 टन प्लास्टिक कचरा इकट्ठा किया। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में महिलाएं 'रिसोर्स रिकवरी सेंटर' चला रही हैं, जहाँ गीले कचरे को वर्मीकम्पोस्ट में बदला जाता है।
स्वच्छता अभियान को स्कूलों के माध्यम से बच्चों तक पहुँचाया गया है। झारखंड के चंदिल में एक स्कूल ने एकल-उपयोग प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगाया और ग्रे-वॉटर प्रबंधन के लिए सोख गड्ढे बनाए। 'स्वच्छता ही सेवा 2026' अभियान के तहत छात्रों को 'स्वच्छता एवं जल संवाद' और सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट (SWM) नियम, 2026 के बारे में जागरूक किया जा रहा है।
सामुदायिक स्तर पर ग्राम पंचायतों और जल एवं स्वच्छता समितियों (VWSC) की भूमिका अहम है। हरियाणा की गाडली ग्राम पंचायत ने सामुदायिक प्रयासों से ओडीएफ प्लस मॉडल का दर्जा प्राप्त किया है। इसी तरह, कर्नाटक का 'स्वच्छ शनिवार' अभियान जन-भागीदारी का एक सफल उदाहरण है, जहाँ हर महीने के पहले शनिवार को सार्वजनिक स्थानों की सफाई की जाती है।
इस मिशन ने रोजगार के नए अवसर भी पैदा किए हैं। मध्य प्रदेश के बैतूल में बबीता धुर्वे जिले की पहली महिला ई-रिक्शा कचरा उठाने वाली बनीं। वहीं पश्चिम बंगाल के नदिया में शौचालय निर्माण के कारण प्रशिक्षित राजमिस्त्रियों की मांग बढ़ी, जिससे लगभग 2,400 लोगों को प्रशिक्षण मिला। गुजरात का वेदांचा गांव एक मॉडल के रूप में उभरा है, जहाँ ग्रे-वॉटर ट्रीटमेंट सिस्टम के जरिए रोजाना 200 किलो-लीटर पानी ट्रीट किया जाता है और पंचायत इससे सालाना लगभग 2.5 लाख रुपये कमा रही है।
'स्वच्छता ही सेवा' अभियान के तहत 2025 में 18.06 करोड़ से अधिक नागरिकों ने हिस्सा लिया। आगामी 'स्वच्छता ही सेवा 2026' की शुरुआत 17 सितंबर से होगी, जिसका विषय "स्वच्छता में सहभाग; स्वच्छ भारत, विकसित भारत" है। इसके अंतर्गत 1 अक्टूबर को सामूहिक श्रमदान और 2 अक्टूबर को विशेष ग्राम सभाओं का आयोजन किया जाएगा।


