11वें आयुर्वेद दिवस पर ITRA जामनगर की विशेष पहल, स्वास्थ्य और जागरूकता कार्यक्रमों से 2,500 से अधिक लोग लाभान्वित
जामनगर स्थित आयुर्वेद शिक्षण और अनुसंधान संस्थान (ITRA) ने 11वें आयुर्वेद दिवस के उपलक्ष्य में स्वास्थ्य देखभाल, पोषण और वैज्ञानिक अनुसंधान गतिविधियों की एक महीने की श्रृंखला आयोजित की है।

गुजरात के जामनगर में स्थित आयुर्वेद शिक्षण और अनुसंधान संस्थान (ITRA) 11वें आयुर्वेद दिवस के अवसर पर जन-जागरूकता, स्वास्थ्य देखभाल, अनुसंधान और वैज्ञानिक गतिविधियों की एक महीने की श्रृंखला का आयोजन कर रहा है। इन कार्यक्रमों का मुख्य केंद्र आयुर्वेद, स्वस्थ जीवनशैली, पोषण, निवारक स्वास्थ्य देखभाल और वैज्ञानिक अनुसंधान है।
इन गतिविधियों का आयोजन आयुष मंत्रालय के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री प्रतापराव जाधव और आयुष मंत्रालय के सचिव पद्मश्री वैद्य राजेश कोटेचा के मार्गदर्शन तथा ITRA की निदेशक प्रोफेसर डॉ. तनुजा नेसरी के प्रयासों से किया जा रहा है। इस अभियान के तहत अब तक कम से कम 2,577 लोग लाभान्वित हुए हैं।
कार्यक्रमों की श्रृंखला में स्वास्थ्य जांच शिविर, चिकित्सा शिविर, पोषण जागरूकता कार्यक्रम और वरिष्ठ नागरिकों के लिए विशेष स्वास्थ्य सेवाएं शामिल हैं। ये गतिविधियां स्कूलों, आंगनवाड़ियों, वृद्धाश्रमों, बालिका गृहों, शिक्षण संस्थानों, औद्योगिक क्षेत्रों और सशस्त्र बलों के प्रतिष्ठानों में आयोजित की गई हैं। विशेष रूप से 7 से 22 सितंबर तक सेना, वायुसेना, नौसेना और CISF के प्रतिष्ठानों सहित अन्य संस्थानों में स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम चलाए गए। इसके साथ ही, आयुर्वेदिक आहार के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए 11 सार्वजनिक स्थानों पर नुक्कड़ नाटकों का प्रदर्शन किया गया।
वैज्ञानिक और शैक्षणिक स्तर पर ITRA ने शोध प्रस्तुतियां, प्रयोगशाला गुणवत्ता नियंत्रण प्रशिक्षण, क्यूआक्ससेल कनेक्ट प्रदर्शन, माइक्रोबायोम कार्यशाला और कायाप्रबोधिनी वेबिनार का आयोजन किया है। युवाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए 'एंशिएंट स्टेपल, मॉडर्न प्लेट' रील प्रतियोगिता, युवा संसद, स्टूडेंट एंबेसडर कार्यक्रम, राष्ट्रीय निबंध एवं ई-पोस्टर प्रतियोगिताएं, रन फॉर आयुर्वेद, मास्टर शेफ कुकिंग प्रतियोगिता और डिजिटल संचार पर संगोष्ठी आयोजित की जा रही हैं।
ITRA की निदेशक प्रोफेसर डॉ. तनुजा नेसरी ने बताया कि इस अभियान का उद्देश्य स्वास्थ्य, पोषण, अनुसंधान, शिक्षा, पर्यावरण और युवाओं की भागीदारी को एक साथ लाना है, ताकि आयुर्वेद को स्वास्थ्य के एक समग्र और निवारक दृष्टिकोण के रूप में बढ़ावा दिया जा सके।



