आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय ने मनाया 11वां आयुर्वेद दिवस, 'स्वस्थ कल के लिए आयुर्वेद' विषय पर दिया जोर
नई दिल्ली के संकल्प भवन में आयोजित इस कार्यक्रम में निवारक स्वास्थ्य देखभाल, टिकाऊ जीवन शैली और औषधीय पौधों के महत्व पर चर्चा की गई।

आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय ने 23 सितंबर, 2026 को नई दिल्ली स्थित संकल्प भवन में 11वां आयुर्वेद दिवस मनाया। आयुष मंत्रालय के नेतृत्व में आयोजित इस राष्ट्रव्यापी समारोह का मुख्य विषय "स्वस्थ कल के लिए आयुर्वेद" था। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य निवारक स्वास्थ्य देखभाल, समग्र कल्याण और टिकाऊ जीवन शैली को बढ़ावा देना था।
इस अवसर पर मंत्रालय द्वारा एक विशेष संगोष्ठी, विचार-विमर्श और वार्ता सत्र का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत में आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय के शहरी स्वास्थ्य सेवा (यूएचएस) के अपर महानिदेशक श्री आर.के. तिवारी ने विषय पर संक्षिप्त व्याख्यान दिया। इसके बाद, अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान, नई दिल्ली के स्वथवृत्त विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर और प्रमुख डॉ. रामअवतार शर्मा ने सामुदायिक कल्याण और रोकथाम के वैज्ञानिक मार्गों पर विशेषज्ञ व्याख्यान दिया। साथ ही, आयुष मंत्रालय के केंद्रीय आयुर्वेदिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (सीसीआरएएस) के डोमेन विशेषज्ञ और सम्पादक डॉ. आशीष कुमार त्रिपाठी ने औषधीय पौधों और आयुर्वेद के महत्व पर प्रकाश डाला।
सत्र के दौरान विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि आधुनिक स्वास्थ्य परिदृश्य में उपचार के बजाय रोकथाम-आधारित दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है। वक्ताओं ने जीवन शैली से जुड़ी बीमारियों और मानसिक तनाव को वर्तमान स्वास्थ्य चुनौतियों का मुख्य कारण बताया। डॉ. रामअवतार शर्मा ने सुझाव दिया कि कार्यालय की दिनचर्या में योग, मुद्रा सुधार और नेत्र-विश्राम (आई-ब्रेक) जैसे छोटे स्व-देखभाल मॉड्यूल को शामिल करके कार्यात्मक उत्पादकता और जीवन शक्ति में सुधार किया जा सकता है।
डॉ. आशीष कुमार त्रिपाठी ने "नेचर फार्मेसी: ट्रेडिशन, साइंस एंड हीलिंग" विषय पर चर्चा करते हुए औषधीय पौधों की चिकित्सीय क्षमता के बारे में बताया। उन्होंने चयापचय स्वास्थ्य को संतुलित करने और प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने के लिए दैनिक कल्याण प्रोटोकॉल (दिनचर्या) और मौसमी अनुकूलन (ऋतुचर्या) की वैज्ञानिक उपयोगिता को समझाया। कार्यक्रम के अंत में, मंत्रालय के अधिकारियों ने विशेषज्ञों के साथ चर्चा की कि कैसे इन निवारक रणनीतियों को शहरी प्रशासनिक ढांचे में प्रभावी ढंग से लागू किया जा सकता है।



