अंतरिक्ष क्षेत्र के निजीकरण से कम हुआ ब्रेन ड्रेन, युवाओं के लिए खुले नए अवसर: डॉ. जितेंद्र सिंह
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोलने से युवा प्रतिभाओं के लिए देश में नए अवसर पैदा हुए हैं, जिससे प्रतिभा पलायन (ब्रेन ड्रेन) में कमी आई है।

केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोलने से देश के भीतर युवा वैज्ञानिकों और तकनीकी विशेषज्ञों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं। इससे युवाओं की विदेश जाने की आवश्यकता कम हुई है और प्रतिभा पलायन (ब्रेन ड्रेन) को रोकने में मदद मिली है।
वाराणसी के रुद्राक्ष इंटरनेशनल कोऑपरेशन एंड कन्वेंशन सेंटर में आयोजित 'नमो बुक फेस्ट' के दौरान छात्रों को संबोधित करते हुए डॉ. सिंह ने बताया कि पहले घरेलू अंतरिक्ष इकोसिस्टम में सीमित अवसरों के कारण कई पेशेवर विदेशों का रुख करते थे। अब स्काईरूट जैसे निजी अंतरिक्ष स्टार्टअप के उदय से युवा इंजीनियरों के लिए भारत में ही व्यापक संभावनाएं उपलब्ध हैं।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने जोर देकर कहा कि "साइलो का युग समाप्त हो गया है" और अब सरकारी संस्थानों, निजी उद्योगों, स्टार्टअप्स और शिक्षाविदों को मिलकर ऐसी वैश्विक प्रतिस्पर्धी क्षमताओं का निर्माण करना चाहिए। उन्होंने बताया कि भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था, जो वर्तमान में लगभग 9 बिलियन अमेरिकी डॉलर है, अगले 8-10 वर्षों में बढ़कर 45-46 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच सकती है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी अब केवल रॉकेट और मिशनों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उपयोग बुनियादी ढांचे की योजना, परियोजना निगरानी और आपदा प्रबंधन में किया जा रहा है। भारतीय उपग्रह नेपाल, बांग्लादेश, म्यांमार और श्रीलंका जैसे पड़ोसी देशों को बाढ़ और अन्य आपदाओं की पूर्व सूचना प्रदान कर उनकी मदद कर रहे हैं।
भारत के वैज्ञानिक परिवर्तन पर चर्चा करते हुए उन्होंने डीप ओशन मिशन, क्वांटम मिशन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), साइबर सुरक्षा और नेशनल रिसर्च फाउंडेशन जैसी पहलों का उल्लेख किया। उन्होंने जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में कोविड-19 के खिलाफ दुनिया के पहले डीएनए टीके के विकास और जीनोम इंडिया पहल को स्वदेशी क्षमताओं का उदाहरण बताया।
डॉ. सिंह ने चंद्रयान-3 की सफलता का जिक्र करते हुए कहा कि भारत ने कम लागत में परिष्कृत मिशन भेजने की क्षमता साबित की है। इसके साथ ही, उन्होंने परमाणु क्षेत्र को निजी भागीदारी के लिए खोलने और 2047 तक 100 गीगावॉट परमाणु ऊर्जा क्षमता हासिल करने के लक्ष्य के बारे में भी जानकारी दी।
अनुसंधान पर सरकार के फोकस को रेखांकित करते हुए उन्होंने बताया कि GERD (Gross Expenditure on R&D) जो वर्ष 2013-14 में लगभग 46,000-47,000 करोड़ रुपये था, अब बढ़कर लगभग 2 से 2.5 लाख करोड़ रुपये हो गया है। उन्होंने छात्रों को AI जैसी तकनीक अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया, लेकिन साथ ही स्वतंत्र सोच और जिज्ञासा बनाए रखने पर जोर दिया।


