आईसीएआर ने 'स्वच्छता ही सेवा' अभियान के तहत कचरा प्रबंधन और स्वच्छता कार्यक्रमों का आयोजन किया
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) ने अपने संस्थानों में गणेश विसर्जन के बाद सफाई और टिकाऊ कचरा प्रबंधन को बढ़ावा देने के लिए जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए हैं।

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) ने 'स्वच्छता ही सेवा' अभियान के अंतर्गत अपने विभिन्न संस्थानों में स्वच्छता और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए। इन कार्यक्रमों का मुख्य उद्देश्य सार्वजनिक स्थानों को स्वच्छ रखना, पर्यावरण की सुरक्षा सुनिश्चित करना और गणेश विसर्जन के बाद कचरे के जिम्मेदार प्रबंधन के प्रति समुदाय की भागीदारी को बढ़ावा देना था।
इस पहल के तहत स्थानीय गणेश पंडालों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए, जहाँ लोगों को पर्यावरण के अनुकूल मिट्टी की मूर्तियों का उपयोग करने के लिए प्रेरित किया गया। नागरिकों को सलाह दी गई कि वे प्लास्टर ऑफ पेरिस (PoP) या हानिकारक केमिकल रंगों से बनी मूर्तियों को पीने के पानी की टंकियों और प्राकृतिक जल स्रोतों में विसर्जित न करें। साथ ही, विसर्जन के लिए निर्धारित स्थानों का उपयोग करने और पूजा सामग्री, प्लास्टिक, थर्मोकोल व सजावट के कचरे के सही निपटान पर जोर दिया गया।
कार्यक्रम के दौरान स्थानीय गणेश पंडालों के आसपास के क्षेत्रों की सफाई की गई और एकत्रित कचरे को अलग-अलग किया गया ताकि उसका सुरक्षित निपटान सुनिश्चित किया जा सके। इस दौरान जल संसाधनों की सुरक्षा और सार्वजनिक स्वच्छता के लिए सामूहिक जिम्मेदारी के महत्व को रेखांकित किया गया।
कचरा प्रबंधन के विशेष प्रयासों के तहत, झारखंड के रांची स्थित आईसीएआर-एनआईएसए (ICAR-NISA) और महाराष्ट्र के मुंबई स्थित आईसीएआर-सीआईआरसीओटी (ICAR-CIRCOT) में फूलों और अन्य बायोडिग्रेडेबल पूजा सामग्री को इकट्ठा कर अलग किया गया। इस एकत्रित सामग्री को खाद केंद्रों में संसाधित कर जैविक खाद में बदला गया, जिससे कचरे को एक उपयोगी संसाधन में परिवर्तित किया जा सका।
इन गतिविधियों के माध्यम से आईसीएआर ने पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता और टिकाऊ कचरा प्रबंधन के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ भविष्य में सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल तौर-तरीके अपनाने को प्रोत्साहित किया है।


