उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने भारतीय चाय उद्योग के आधुनिकीकरण और वैश्विक ब्रांडिंग पर दिया जोर
उपराष्ट्रपति ने उपासी चाय अनुसंधान फाउंडेशन के शताब्दी सम्मेलन में भारतीय चाय को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए अनुसंधान, ब्रांडिंग और मूल्य वर्धन की आवश्यकता बताई।

भारत के उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने नीलगिरी के कूनूर में यूनाइटेड प्लांटर्स एसोसिएशन ऑफ सदर्न इंडिया (UPASI) चाय अनुसंधान फाउंडेशन के शताब्दी सम्मेलन का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने वैश्विक बाजार में भारतीय चाय की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के लिए व्यापक अनुसंधान, कारखानों के आधुनिकीकरण, ब्रांडिंग और मूल्य वर्धन (वैल्यू एडिशन) पर विशेष जोर दिया।
फाउंडेशन द्वारा चाय उद्योग, बागान मालिकों और श्रमिकों की सेवा के 100 वर्ष पूरे होने पर बधाई देते हुए उपराष्ट्रपति ने अनुसंधान एवं विकास में इसके योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया के सबसे बड़े चाय उत्पादक और उपभोक्ता देशों में से एक है, इसलिए खेती के साथ-साथ कुशल प्रसंस्करण और उत्पादन पर ध्यान देना आवश्यक है। श्री राधाकृष्णन ने ऐसे अनुसंधान को बढ़ावा देने की बात कही जिससे उत्पादकता, गुणवत्ता और किफायत में सुधार हो सके।
वैश्विक प्रतिस्पर्धा का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत को अपनी चाय के विपणन (मार्केटिंग) को बेहतर बनाने और राजस्व बढ़ाने की जरूरत है। उन्होंने हितधारकों से आग्रह किया कि वे चाय उद्योग की जरूरतों का व्यवस्थित आकलन करें और ठोस परियोजनाओं के लिए केंद्र व राज्य सरकारों के साथ मिलकर काम करें। उन्होंने चाय उत्पादकों और निर्यातकों से केवल थोक बिक्री तक सीमित न रहकर मजबूत भारतीय ब्रांड विकसित करने का आह्वान किया, ताकि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारतीय चाय की पहचान और उपस्थिति बढ़ सके।
उपराष्ट्रपति ने बागान श्रमिकों के कल्याण को उद्योग की प्रगति और स्थिरता का अभिन्न अंग बताया और कहा कि "उद्योग और श्रमिकों का कल्याण साथ-साथ होना चाहिए।"
कार्यक्रम के दौरान उपराष्ट्रपति ने "टी रिसर्च इन साउथ इंडिया – ए कम्पेंडियम" नामक पुस्तक का विमोचन किया, जो दक्षिण भारत में चाय अनुसंधान की विरासत और योगदान पर आधारित है। इस कार्यक्रम में तमिलनाडु के राज्यपाल श्री राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर, उदगमंडलम के विधायक श्री भोजराजन, भारतीय चाय बोर्ड के उपाध्यक्ष श्री सी. मुरुगन और उपासी के अध्यक्ष श्री अजय थिपैया सहित कई गणमान्य व्यक्ति, कृषि वैज्ञानिक और उद्योग प्रतिनिधि उपस्थित थे।


