कर्नाटक में अनुसूचित जनजातियों के संवैधानिक सुरक्षा उपायों और विकास योजनाओं की समीक्षा की गई
राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST) ने बेंगलुरु में एक बैठक आयोजित कर कर्नाटक में जनजातीय समुदायों के लिए कल्याणकारी कार्यक्रमों और संवैधानिक अधिकारों के कार्यान्वयन की समीक्षा की।

राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST) ने बेंगलुरु के रेडिसन ब्लू सम्मेलन हॉल में आयोजित एक समीक्षा बैठक के दौरान कर्नाटक राज्य में अनुसूचित जनजातियों के लिए संवैधानिक सुरक्षा उपायों, कल्याणकारी उपायों और विकास कार्यक्रमों के कार्यान्वयन की व्यापक समीक्षा की। इस बैठक की अध्यक्षता NCST के अध्यक्ष श्री अंतर सिंह आर्य ने की। बैठक में आयोग के सदस्य श्री जातोथु हुसैन, संयुक्त सचिव श्री अमित निर्मल और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। वहीं, राज्य सरकार की ओर से मुख्य सचिव, महानिदेशक (पुलिस), अतिरिक्त मुख्य सचिव, प्रधान सचिव और विभिन्न विभागों के सचिवों ने भाग लिया।
यह समीक्षा प्रक्रिया आयोग द्वारा पूर्व में भेजी गई विस्तृत प्रश्नावली, कर्नाटक सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों, जनजातीय समुदायों से प्राप्त शिकायतों, फीडबैक और आयोग के पिछले क्षेत्रीय दौरों के अनुभवों के आधार पर की गई। बैठक के दौरान आरक्षण, बैकलॉग रिक्तियों, अनुसूचित जनजाति घटक के तहत निधियों के उपयोग, जनजातीय भूमि और वन अधिकारों सहित कई महत्वपूर्ण मुद्दों की जांच की गई।
आयोग ने विशेष रूप से वन अधिकार अधिनियम, 2006 के तहत बड़ी संख्या में दावों के खारिज होने पर चिंता जताई और लंबित एवं अस्वीकृत दावों की गहन जांच की आवश्यकता पर बल दिया। बैठक में संवैधानिक सुरक्षा उपायों की निरंतर निगरानी के लिए एक विशेष 'कर्नाटक राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग' की स्थापना के प्रस्ताव पर चर्चा हुई। साथ ही, शिक्षा और सार्वजनिक रोजगार में अनुसूचित जनजातियों के प्रभावी प्रतिनिधित्व और बैकलॉग रिक्तियों को भरने के उपायों पर भी विचार किया गया।
बैठक में कमजोर जनजातीय समूहों (PVTGs), विशेष रूप से कोरगा और जेनू कुरुबा समुदायों के सामाजिक-आर्थिक विकास पर विशेष जोर दिया गया। इसमें उनके स्वास्थ्य, पोषण, आवास, शिक्षा, आजीविका, भूमि अधिकारों और बुनियादी सेवाओं तक पहुंच को प्राथमिकता देने की बात कही गई। NCST ने संबंधित विभागों से उठाए गए मुद्दों पर समयबद्ध कार्रवाई करने का आग्रह किया और प्रतिबद्धता जताई कि संवैधानिक और कल्याणकारी उपाय जमीनी स्तर पर प्रभावी परिणाम दें।
