कृषि क्षेत्र में परिणाम देना जरूरी, केवल बैठकों से काम नहीं चलेगा: शिवराज सिंह चौहान
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने हैदराबाद में दक्षिणी राज्यों की क्षेत्रीय कृषि कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए फार्मर आईडी और एग्रीस्टैक जैसे लक्ष्यों को समय सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए।

केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने हैदराबाद में आयोजित दक्षिणी राज्यों की क्षेत्रीय कृषि कॉन्फ्रेंस के समापन सत्र को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने राज्यों को कृषि क्षेत्र में निर्धारित लक्ष्यों और प्रतिबद्धताओं को तय समय सीमा के भीतर पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि कॉन्फ्रेंस में चर्चा किए गए 'एक्शनएबल पॉइंट्स' पर गंभीरता से काम करना होगा, अन्यथा पूरी कवायद बेकार हो जाएगी।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि केंद्र और राज्य मिलकर एक 'एग्रीकल्चर टीम' हैं, जिसमें वैज्ञानिक, किसान और सरकारी अधिकारी शामिल हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल बैठकें करने से काम नहीं चलेगा, बल्कि धरातल पर परिणाम देना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यदि किसी राज्य ने फार्मर आईडी का काम दिसंबर तक पूरा करने का वादा किया है, तो उसे हर हाल में पूरा करना होगा।
फार्मर आईडी और डिजिटल प्रगति पर बात करते हुए श्री चौहान ने बताया कि तेलंगाना और कर्नाटक में फार्मर आईडी बनाने का काम 75 प्रतिशत से अधिक पूरा हो चुका है। साथ ही, डिजिटल क्रॉप सर्वे में अंडमान निकोबार, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक और केरल ने पूर्णता हासिल की है। हालांकि, उन्होंने केरल, तमिलनाडु और अंडमान निकोबार द्वीप समूह को फार्मर आईडी बनाने की प्रक्रिया में और अधिक मेहनत करने की आवश्यकता बताई।
लैंड रिकॉर्ड और किसान रजिस्ट्री के संबंध में उन्होंने तमिलनाडु और केरल को लैंड पार्सल जोड़ने का काम तेजी से पूरा करने को कहा। उन्होंने कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु और अंडमान निकोबार द्वीप समूह को बटाईदार या किरायेदार किसानों (Tenant Farmers) के लिए एसओपी (SOP) बनाकर नोटिफाई करने का निर्देश दिया, जबकि पुडुचेरी और लक्षद्वीप को गांवों के नक्शों की जियो रिफरेंसिंग का कार्य पूरा करना है।
किसानों की सुविधा के लिए केंद्रीय मंत्री ने 'भारत विस्तार' व्यवस्था की जानकारी दी। वर्तमान में हिंदी और अंग्रेजी में उपलब्ध यह सेवा अब तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और मलयालम सहित 13 क्षेत्रीय भाषाओं में शुरू की जाएगी, जिससे किसान अपनी भाषा में सलाह ले सकेंगे। इसके अलावा, उन्होंने राज्यों से आग्रह किया कि लैब से लैंड तक रिसर्च पहुंचाने के लिए वैज्ञानिकों को किसानों के बीच ले जाएं।
भारत को कृषि के क्षेत्र में दुनिया का 'फूड बास्केट' और सिरमौर बनाने का लक्ष्य रखते हुए श्री चौहान ने आगामी रबी कॉन्फ्रेंस की घोषणा की। उन्होंने बताया कि 28 और 29 सितंबर को दिल्ली के पूसा संस्थान में रबी कॉन्फ्रेंस होगी, जिसमें सभी राज्यों के कृषि मंत्री और अधिकारी फसलवार प्लान लेकर आएंगे। इसके आधार पर बीज, फर्टिलाइजर और अन्य संसाधनों की उपलब्धता का आकलन किया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि इस क्षेत्रीय कृषि कॉन्फ्रेंस के दौरान कर्नाटक और तमिलनाडु जैसे बड़े राज्यों के कृषि मंत्री और प्रतिनिधि शामिल नहीं हुए।



