क्षमा का अर्थ बदले की जगह सुधार और घृणा के स्थान पर संवाद है: उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन
उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने नई दिल्ली में आयोजित महापर्व क्षमापना समारोह-2026 को संबोधित करते हुए अहिंसा और करुणा के वैश्विक मूल्यों पर जोर दिया।

उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने नई दिल्ली के विज्ञान भवन में भगवान महावीर स्मारक समिति और जैन महासभा दिल्ली द्वारा आयोजित 'महापर्व क्षमापना समारोह-2026' को संबोधित किया। इस अवसर पर उन्होंने क्षमा, मित्रता, अहिंसा और आंतरिक शुद्धि को सार्वभौमिक मूल्य बताते हुए कहा कि क्षमा का अर्थ अन्याय को स्वीकार करना या सत्य से समझौता करना नहीं है, बल्कि इसका अर्थ बदले की जगह सुधार, घृणा के बजाय बातचीत और शत्रुता के स्थान पर सुलह को चुनना है।
अहिंसा के विषय में उपराष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि अहिंसा केवल शारीरिक हिंसा की अनुपस्थिति नहीं है, बल्कि विचार, वचन और कर्म में हिंसा का अभाव है। उन्होंने कहा कि भगवान महावीर की शिक्षाएं दुनिया में शांति, संवाद, सह-अस्तित्व और करुणा का मार्ग प्रशस्त करती हैं। श्री राधाकृष्णन ने उल्लेख किया कि जैन परंपरा ने क्षमा को जिस गहराई से आध्यात्मिक अनुशासन में बदला है, वह आज की मानवता के लिए अत्यंत प्रासंगिक है और क्षमापना केवल एक अनुष्ठान नहीं, बल्कि हृदय परिवर्तन का अवसर है।
तमिलनाडु और जैन धर्म के संबंधों पर चर्चा करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि जैन धर्म ने तमिल साहित्य और संस्कृति में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने शास्त्रीय तमिल साहित्य में जैन विद्वानों और भिक्षुओं की भूमिका के साथ-साथ तमिलनाडु में स्थित प्राचीन जैन मंदिरों और शिक्षा केंद्रों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सभी जीवित प्राणियों के प्रति मित्रता का जैन दर्शन भारत के 'वसुधैव कुटुम्बकम' के लोकाचार के अनुरूप है।
'विकसित भारत @ 2047' के दृष्टिकोण पर बात करते हुए श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि विकास को केवल आर्थिक समृद्धि, बुनियादी ढांचे और तकनीकी प्रगति तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि एक वास्तव में विकसित भारत में नागरिकों के बीच विश्वास, परिवारों में मूल्य, युवाओं में चरित्र और समाज में करुणा होनी चाहिए, जो 'विकास भी, विरासत भी' के दृष्टिकोण को सार्थक करे।
कार्यक्रम के दौरान उपराष्ट्रपति ने श्री के. सी. जैन को 'जैन समाज रत्न पुरस्कार' से सम्मानित किया। इस समारोह में पंजाब के राज्यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया, भगवान महावीर स्मारक समिति के अध्यक्ष श्री कन्हैया लाल जैन, जैन महासभा दिल्ली के अध्यक्ष श्री दिनेश दोषी, आचार्य श्री विशुद्ध सागरजी मुनिराज, श्री विपिन जैन, मुनिश्री उदित कुमार जी, मुनिश्री तीर्थ निर्वाण विजय जी और उपाध्याय श्री रविंदर मुनि जी सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

