गंगा संरक्षण: केंद्रीय मंत्री सी.आर. पाटिल ने ईटीएफ की 20वीं बैठक में नमामि गंगा की प्रगति की समीक्षा की
केंद्रीय जल शक्ति मंत्री ने गंगा संरक्षण पर अधिकार प्राप्त कार्य बल की बैठक में सीवरेज अवसंरचना, जल प्रबंधन और शिक्षा में जल-संबंधी पाठ्यक्रमों को शामिल करने पर चर्चा की।

नई दिल्ली में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री सी. आर. पाटिल की अध्यक्षता में गंगा संरक्षण पर अधिकार प्राप्त कार्य बल (ईटीएफ) की 20वीं बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में 'नमामि गंगा' कार्यक्रम की प्रगति की समीक्षा की गई और नदी संरक्षण को तेज करने के लिए बेहतर सीवरेज अवसंरचना, वैज्ञानिक जल प्रबंधन, उपचारित अपशिष्ट जल के सुरक्षित पुन: उपयोग और पारिस्थितिकीय पुनर्स्थापना जैसे प्रमुख उपायों पर विचार-विमर्श किया गया।
बैठक के दौरान वित्त वर्ष 2025-26 के प्रदर्शन की समीक्षा की गई। जानकारी दी गई कि अगस्त 2026 तक कुल 43,266 करोड़ रुपये की लागत से 527 परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं, जिनमें से 368 पूरी हो चुकी हैं। सीवरेज अवसंरचना के तहत 219 स्वीकृत परियोजनाओं में से 147 पूरी हो चुकी हैं, जिससे 4,339 एमएलडी की सीवेज उपचार क्षमता और 4,615 किलोमीटर का सीवर नेटवर्क निर्मित हुआ है। केंद्रीय मंत्री ने लंबित डीपीआर और भूमि संबंधी बाधाओं को दूर कर परियोजनाओं को समय पर पूरा करने के निर्देश दिए।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विज़न को आगे बढ़ाते हुए, बैठक में शिक्षा में जल प्रबंधन को शामिल करने पर जोर दिया गया। रिवर सिटी गठबंधन के तहत एनएमसीजी और एनआईयूए ने 'शहरी नदी प्रबंधन के सिद्धांत' और 'पर्यावरण अनुकूल तटवर्ती विकास' जैसे पाठ्यक्रम तैयार किए हैं, जो वर्तमान में मित्राज सर्वजनिक विश्वविद्यालय, ओपी जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी और स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर, भोपाल में संचालित हैं।
बैठक में विशेष रूप से उत्तर प्रदेश के पीलीभीत स्थित गोमती उद्गम स्थल के संरक्षण और बिहार में निरंजना/फल्गु नदी के पुनरुद्धार की समीक्षा की गई। इसके अतिरिक्त, यमुना नदी के संरक्षण के लिए मथुरा-वृंदावन, आगरा, फिरोजाबाद और इटावा जैसी परियोजनाओं के साथ-साथ दिल्ली में शहरी नदी प्रबंधन योजना और ड्रोन-आधारित सर्वेक्षण जैसी पहलों पर चर्चा हुई।
केंद्रीय मंत्री श्री सी. आर. पाटिल ने नदी संरक्षण के लिए एक एकीकृत दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता बताई, जिसमें प्रदूषण नियंत्रण के साथ-साथ भूजल सुरक्षा, जैव विविधता संरक्षण और सामुदायिक भागीदारी शामिल हो। बैठक में 'स्वच्छता ही सेवा 2026' और विश्व नदी दिवस के दौरान चलाए गए जागरूकता अभियानों की भी समीक्षा की गई। इस अवसर पर जल शक्ति राज्य मंत्री श्री राज भूषण चौधरी और विभिन्न मंत्रालयों एवं राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।



